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यात्रा में क्या खाकर जाये जिससे ग्रह अनुकूल हों जाये

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यदि व्यक्ति कुछ जरुरी कार्य से यात्रा पर जा रहा होतो हर दिशा का अधिपति देवता होता है और उस देवता के अनुकूल खाद्य पदार्थ खाकर जाने से उस दिशा का देवता यात्रा करने वाले को अनुकूल फल देता है ।

यदि आप पूरब दिशा कि यात्रा कर रहे है तो घी मिश्रित अन्न खाकर यात्रा करे , तिल का चूर्ण मिला हुआ अन्न खाकर दक्षिण कि यात्रा करे ,और घृत मिश्रित खीर खाकर उत्तर दिशा कि यात्रा करने से शत्रुओ पर विजय मिलती है । रविवार को सज्जिका ( मिश्री और मसाला मिला हुआ दही ) , सोमवार को खीर , मगलवार को कांजी , बुधवार को दूध , गुरुवार को दही , शुक्रवार को दूध तथा शनिवार को भात और तिल खाकर यदि यात्रा करे शत्रुओ पर विजय प्राप्त होती है।

यदि नक्षत्रो के अनुसार यात्रा करनी हों तो अश्वनी उडद से बनी वस्तु , भरणी में में तिल, कृत्तिका में उडद , रोहिणी में गाय का दही , मृगशिरा में गाय का घी, आर्द्र में गाय का दूध , अश्लेषा में खीर माघ में नील कंठ पक्षी के दर्शन , हस्त में चांवल , चित्रा में कांगनी, स्वाति में मालपुवा , अनुराधा में फल (केला , आम आदी ऋतुफल), उत्तराषड में शाल्य (अगहनी धान का चांवल ), अभिजीत में हविष्य अर्थात मीठा अन्न ,श्रवन में खिचड़ी , धनिष्ठा में मूंग , शतमिषा में जो का आटा , उत्तरा भाद्रपद में खिचड़ी तथा रेवती में दही मिले चांवल खाकर वाहन पर बैठकर यात्रा करने से यात्रा में वांछित सफलता मिलती है और उसके सोचे हुए कार्य सफलता मिलती है।

यात्रा में शकुन

यात्रा काल में रला नाम का पक्षी , चूहा, शियारिन, कव्वा तथा कबूतर इनके शब्द बाए भाग में सुने दे तो शुभ होता है। छछुंदर ,उल्लू ,पल्ली और गदहा ये यात्रा के समय बांये भाग मिले तो शुभ होता है कोयल , काला सर्प,तोता और भरदूल आदि पक्षी यदि दाहिने और मिले तो शुभ और श्रेष्ठ होता है । काले रंग को छोड़कर सभी रंग के चोपाये ( गाय, घोडा आदि ) यदि बांये भाग में दिखे तो शुभ होता है तथा यात्रा काल में गिरगिट के दर्शन शुभ नाही होते है ।

यात्राकाल में सूअर , खरगोश , गोह और सर्पो कि चर्चा शुभ होती है। किन्तु किसी भूली हुई वस्तु को खोजने जाना होतो इनकी चर्चा अच्छी नही होती है। भालू और वानरों कि चर्चा से विपरीत फल मिलता है यात्रा में मोर , बकरा, नेवला, नीलकंठ और कबूतर दिख जाये तो इनके दर्शन मात्र से ही शुभ होता है। परन्तु लोट कर अपने नगर या घरमें आते समय ये दर्शन दे तो अशुभ समझना चाहिए। यात्राकाल में रोदन शब्द रहित कोई शव या मुर्दा दिख पड़े तो शुभ समझना चाहिए। अर्थात यात्रा शुभ होगी। परन्तु घर लोटते समय या ग्रह प्रवेश के समय ये सब शकुन हों तो अरिष्ट होता है।

यात्रा के समय अपशकुन यात्रा के समय पतित , नपुंसक , जटाधारी , पागल ओषधि आदि खाकर उलटी करने वाला , शरीर में तेल लगाने वाला ,वसा, हड्डी, चर्म, अंगार (ज्वाला रहित अग्नि ) , दीर्घ रोगी , गुड , कपास, रुई, प्रश्न पूंछने या टोकने का शब्द , त्रण, गिरगिट , वन्ध्या स्त्री , कुबड़ा , गेरुवा वस्त्र धारी, खुले केशवला , भूका तथा नंगा ये सब यात्रा के समय सामने मिल जाए तो यात्रा सफल नही होती |

यात्रा के समय शुभ शकुन

प्रज्वलित अग्नि, सुदर घोडा , राज सिंहासन , सुन्दर स्त्री , चन्दन आदि कि सुगंध , फल , अक्षत, छत्र, चामर, डोली या पालकी, राजा , खाद्य पदार्थ ईख, फल चिकनी मिट्टी , अन्न, घृत , दही, गोबर, चुना , धुला हुवा वस्त्र , शंख, सफ़ेद बैल , ध्वजा, शोभाग्य वाली श्त्री , भरा हुआ कलश , रत्न, भंगार, , गोऊ, ब्राह्मिन , नगाडा, मृदंग, दुन्धुबी , घंटा तथा बीना (बांसुरी), आदि वाध्यो के शब्द , वेद मंत्र एंव मंगल गीत , आदि के शब्द यह सब यात्रा के समय देखने या सुनने में आये तो यात्रा में सभी शुभ फल मिलते है |

अपशकुन परिहार

यदि अप शकुन हों जाये परन्तु यात्रा करना जरुरी हों तो शास्त्रों में उसका परिहार इस प्रकार दिया है यात्रा के समय पहली बार अप शकुन होने पर खड़े होकर इष्टदेव का स्मरण करे और चलदे यदि दूसरी बार अप शकुन हों जाये तो इष्ट मंत्र कि एक माला मन ही मन जपे और दान पुण्ये करे और चल्देना चाहिए | यदि उसी दिन तीसरी बार अप शकुन हों जाये तो यात्रा स्थगित कर देनी चाहिए |

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