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नीतू नवगीत के लोक गीतों पर झूमे श्रोता

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उमेश कुमार विप्लवी, हाजीपुर/औरंगाबाद। बिहार दिवस समारोह के प्रथम दिन के कार्यक्रम के शुभारंभ की घोषणा करते हुए जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने सभी जिलावासियों को बिहार दिवस की बधाई देते हुए कहा कि जिला प्रशासन राज्य सरकार के सात संकल्पों के अनुसार विकास के सारे कार्यक्रम का संचालन कर रही है जिसका लाभ सभी जिला वासियों को मिलेगा।

उन्होंने शराबबंदी के बाद दहेज प्रथा की समाप्ति और बाल विवाह को रोकने के लिए युवाओं को आगे बढ़कर पहल करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सामाजिक कुरीतियों का अंत किए बिना बिहार का पूर्ण विकास संभव नहीं है। इसी तरह हर घर में शौचालय के निर्माण के लिए भी जिले के हर नागरिक को अपना योगदान करना होगा।

प्रथम दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत में बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने अनेक पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति करके उपस्थित श्रोताओं का मन मोहा। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना मंगल के दाता निरहुआ बिगड़ी बनाई जी से की और उसके बाद एक से बढ़कर एक पारंपरिक गीतों को प्रस्तुत किया जिसमें ; हमारा आम अमरैया बड़ा नीक लागेला, लाली चुनरिया शोभे हो, शोभे लाली टिकुलिया, फल गइले नेमुआ कि परदेसी बलमुआ जी ना अइले सहित अनेक कर्णप्रिय लोक गीत गाए।

अपनी गायकी के माध्यम से उन्होंने दहेज प्रथा एवं बाल विवाह की समाप्ति तथा लड़कियों को शिक्षित बनाने पर जोर दिया । बिहार की प्रसिद्ध लोकगायिका कुमारी नवगीत ने अपने नए एल्बम बिटिया है अनमोल रतन के गीतों के माध्यम से लोगों से आग्रह किया कि नई सामाजिक चेतना और नए बिहार के निर्माण के लिए सब लोग एकजुट होकर आगे आएं । नारी शिक्षा पर जोर देते हुए नीतू कुमारी नवगीत ने गाया-बिटिया के भैया पढ़ावल जाई हो, जननी है काल्हे की, बचावल जाई हो।

दहेज प्रथा की समाप्ति और नारियों के मान की रक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने लोकगीत पेश किया- या रब हमारे देश में बिटिया का मान हो
जेहन में बेटों जितना ही बेटी की शान हो
इज्जत बची रहे सभी बिटिया की मुल्क में
खेलें न कोई खून की होली दहेज में।

इसी तरह नारी अशिक्षा और बाल विवाह की बुराई की समाप्ति के लिए एक लड़की की अपील को उन्होंने स्वर दिया –
खेले धूपे के दिन में न शादी करी होईहैं बर्बादी हो
रऊवा आई सब खराबी, हम तोहके बता दी हो ।
बेटियों के अरमानों को जिंदा रखना और उन्हें समाज में आगे बढ़ने के लिए सही माहौल पैदा करने की जरूरतों पर बल देते हुए डॉ नीतू कुमारी नवगीत ने लोक गीत पेश किया-
बेटी को बचाने चलो देश ने पुकारा है
आज समय फिर आया लेने, इम्तेहां हमारा है
छीनेंगे ना बिटिया के हाथों से गुड़िया
तोडेंगे न बगिया से फूलों की कलियां
मिलजुल कर हम बाल विवाह को जड़ से मिटायेंगे ।

गायिका नीतू कुमारी नवगीत को हारमोनियम पर राकेश कुमार, नाल पर मनोज कुमार सुमन, तबला पर सुरजीत कुमार, कैसियो पर सुजीत कुमार और पैड पर पर आशीष कुमार तिवारी ने संगत किया ।

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