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राइजिंग इंडिया की बुलन्द सोच से बदलता नजरिया

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vaanishree updates, man ki baatआलेख: कमलेश पांडे, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार। जब हम राइजिंग कहते हैं तो अंधेरे से उजाले की ओर जाने का भाव आता है, यानी कि हम जहां थे, जिस स्थिति में थे, उससे आगे बढ़ने, बेहतर भविष्य की ओर जाने के लिये ततपर हैं।  वास्तव में राइज करना-उदय होना, जब हम देश के संदर्भ में बोलते हैं तो उसका विस्तार बहुत व्यापक हो जाता है। इसलिये उत्सुकतावश सवाल कि ये राइज़िंग इंडिया क्या है? क्या सिर्फ अर्थव्यवस्था की मजबूती है, सेंसेक्स का रिकॉर्ड स्तर पर होना है, विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर होना है या फिर रिकॉर्ड विदेशी निवेश आना है?

दरअसल राइजिंग इंडिया का मतलब है देश के सवा सौ करोड़ लोगों के स्वाभिमान का राइज होना, उसके आत्मगौरव का राइज होना। जब इन्हीं सवा सौ करोड़ लोगों की इच्छाशक्ति एकजुट हो जाती है, उनके संकल्प एक हो जाते हैं तो असाध्य भी साध्य हो जाता है, असंभव भी संभव बन जाता है। इसलिये  एकजुट हुई यही इच्छाशक्ति आज न्यू इंडिया के संकल्प को पूरा कर रही है।

बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उपर्युक्त विचारों से असहमत होने का कोई कारण मुझे नहीं दिखता, बल्कि इसमें विकास की असीम सम्भावनाएं मुझे दिखाई दे रही हैं, क्योंकि उनकी यह नीति ‘अग्र सोची, सदा सुखी’ रहने का पर्याय है। इसके मूल में ‘शाइनिंग इंडिया’ का भाव निहित है। इसलिए हमलोगों को फील गुड करना चाहिए और इसे साकार करने हेतु अनवरत परिश्रम करना चाहिए। इस नजरिए से सामूहिक चेतना विकसित करना चाहिए।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि बहुत से देशों में यह अवधारणा रही है कि सरकार विकास को, परिवर्तन को नेतृत्व प्रदान करे और नागरिक उसका अनुशरण करें। लेकिन पिछले चार वर्षों में मोदी सरकार ने यह स्थिति बदल दी है। इसलिये अब देश का हर नागरिक नेतृत्व प्रदान करता है और सरकार उसका अनुशरण करती है। यही वजह है कि इतने कम समय में स्वच्छ भारत मिशन एक जन-आंदोलन बन गया, जिसमें मीडिया ने भी एक पार्टनर की तरह भूमिका निभाई।

यही नहीं, कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी लड़ाई में भी लोगों ने ‘डिजिटल भुगतान’ को अपना एक मजबूत हथियार बना लिया है। इसी वजह से आज यह देश डिजिटल पेमेंट करने वाले और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक हो चुका है। ऐसा इसलिये कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की हर कार्रवाई को जिस तरह से लोगों का समर्थन मिलता है, वह इस बात का गवाह है कि देश को उसकी आंतरिक बुराइयों से मुक्ति दिलाने के लिए किस तरह लोगों ने कमर कस रखी है।

वास्तव में, मोदी सरकार के राजनीतिक विरोधी चाहे जो बोलें, लेकिन देश के लोगों की इसी प्रेरणा की वजह से यह सरकार बड़े फैसले ले सकी और उन्हें लागू करके दिखाया। हैरत की बात है कि जिन फैसलों की सिफारिश दशकों पहले की गई थी, लेकिन उन्हें फाइलों में दबाकर रखा गया; जो कानून दशकों पहले पास हुए लेकिन भ्रष्टतंत्र के दबाव में लागू नहीं किए गए, उन्हें भी इस सरकार ने लागू किया और अब इन्हीं कानूनों के आधार पर बड़े स्तर पर कार्रवाई हो रही है।

कहने का तातपर्य यह कि चाहे देश का उदय हो या फिर किसी समाज और व्यक्ति का, अगर बराबरी का भाव नहीं होगा तो न संकल्प सिद्ध होंगे और न ही समाज अग्रगामी और सदाशयी बनेगा। इसलिए अगर एक विजन के तौर पर देखें तो मोदी सरकार राष्ट्रीय स्तर पर असंतुलन के इस भाव को खत्म करने का निरंतर प्रयास कर रही है। और यह गौर करने वाली बात होगी कि इसका परिणाम क्या आता है।

दरअसल, हार-हताशा-निराशा का वातावरण कभी भी किसी देश को आगे नहीं ले जा सकता। इसलिये सरकार ने हतोत्साहित लोगों में एक नया आत्मविश्वास और विकास के प्रति जिज्ञासा-ललक का भाव पैदा किया। विगत चार वर्षों में देश के लोगों में, देश को चलाने वाली व्यवस्थाओं में किस तरह एक हौसला पैदा हुआ है, एक भरोसा आया है, उसकी आज सभी जगह चर्चा हो रही है। चर्चा की सकारात्मक हो रही, नकारात्मक नहीं।

मसलन, जो परिवर्तन लोग अपने सामने देख रहे हैं, अपने जीवन में देख रहे हैं, उससे हर भारतीय में यह विश्वास आया है कि 21वीं सदी का भारत अपनी कमजोरियों को छोड़कर, अपने बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ सकता है, एक भारत-श्रेष्ठ भारत के सपने को सच कर सकता है। लोगों का ये प्रबल विश्वास ही राइजिंग इंडिया का आधार है। यही वजह है कि आज पूरा विश्व, भारत के इस उदय को, राइजिंग इंडिया को मान दे रहा है, सम्मान दे रहा है।

देखा जाए तो पहले की सरकार के दस वर्षों में जितने राष्ट्राध्यक्ष और राष्ट्रप्रमुख भारत आए, और जितने पिछले चार वर्षों में भारत आए, उसकी तुलना ही अपने आप में काफी कुछ कह जाती है। पहले की सरकार में औसतन एक साल में विश्व के जितने बड़े नेता आते थे, अब उसके तकरीबन दोगुने राष्ट्राध्यक्ष और राष्ट्रप्रमुख प्रतिवर्ष भारत आ रहे हैं। ये राइजिंग इंडिया की एक ऐसी तस्वीर है, जिस पर आप सभी को गर्व होगा।

अमूमन, भारत सिर्फ अपना ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के विकास को एक नई दिशा दी है। बीते चार वर्षों में जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत का प्रभाव बढ़ा है, उसके लिए एक समझी-बूझी रणनीति के तहत निरंतर कार्य किया गया। भारत ने दुनिया को शांति का, विकास का, समावेशी विकास का सन्देश दिया है। उसने बड़े-बड़े समूहों चाहे संयुक्त राष्ट्र हो या जी-20, में ऐसे विषय उठाए हैं जो पूरे विश्व को प्रभावित करते हैं। वाकई आतंकवाद सिर्फ एक देश या एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि दुनिया के हर देश के लिए एक चुनौती है, इस बात को भारत ने ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया है।

यही नहीं, जिन संस्थाओं की सदस्यता के लिए भारत बरसों से प्रयास कर रहा था, वो उसे अब हासिल होने लगी है। ‘मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम’ में शामिल होने के बाद भारत ‘वासेनार अरेंजमेंट’ और ‘ऑस्ट्रेलिया ग्रुप’ में भी शामिल हो चुका है। ‘इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फ़ॉर द लॉ ऑफ द सी’ के चुनाव में, ‘इंटरनेशनल मेरीटाइम आर्गेनाईजेशन’ के चुनाव में, ‘यूनाइटेड नेशन्स इकॉनोमिक एंड सोशल काउंसिल’ के चुनाव में भारत को विजय प्राप्त हुई है। ‘इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस’ में जिस तरह भारत को जीत मिली, उसकी तो दुनिया भर में चर्चा हुई है।

दरअसल, यह हमारे बढ़ते प्रभाव का ही असर है कि डिप्लोमेसी में मानवीय मूल्यों को सबसे ज्यादा महत्व देने वाली हमारी नीति ने दुनिया को यह एहसास कराया है कि भारत सिर्फ अपने हित के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक हित के लिए भी काम कर रहा है। ‘सबका साथ-सबका विकास’ का इसका मंत्र देश की सीमाओं के दायरे में बंधा हुआ नहीं है। आज यह आयुष्मान भारत के लिए ही नहीं, बल्कि आयुष्मान विश्व के लिए भी कार्य कर रहा है। इसलिये योग और आयुर्वेद को लेकर दुनिया भर में जो जागरूकता आ रही है, वो भी राइजिंग इंडिया का ही एक प्रतिबिंब है।

आज विश्व में भारत के संदर्भ में जो बातें होती हैं, वो आशा और विश्वास के साथ होती हैं, पूरे भरोसे के साथ होती हैं। इसको और अधिक मजबूत बनाने के लिए, बढ़ावा देने के लिए ही सरकार स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन जैसे कार्यक्रम चला रही है। विशेषकर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, नौजवानों और महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बन रही है।

अगर इन सारे प्रयासों को एक बुके के तौर पर देखें, तो ये कार्य मध्यम वर्ग और शहरी युवा की आकांक्षाओं-उम्मीदों को पूरा करने वाले और रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाले साबित हो रहे हैं। इसलिये सरकार को उम्मीद है कि विकास की मुख्यधारा में पीछे छूट गया चाहे कोई भी व्यक्ति हो या क्षेत्र, जब वो तेज गति से आगे बढ़ेगा, उसकी शक्तियों, उसके संसाधनों के साथ न्याय होगा, तो राइजिंग इंडिया की स्टोरी और भी अधिक सशक्त होगी।

लिहाजा, प्रेरणादायी सवाल है कि 2022 में न्यू इंडिया और संकल्प से सिद्धि की यात्रा के मद्देनजर क्या आपने कोई संकल्प लिया? क्या कोई रोडमैप तैयार किया? क्या इस बारे में सोचा कि हम ऐसा क्या करें जो न्यू इंडिया के सपने को पूरा करने में मददगार बनेगा?

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