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शिक्षकों का दोहन कब आखिर कब तक करेगी सरकार

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नितेश कुमार चौधरी, जन्दाहा। एकओर जहां सारा देश शिक्षक दिवस के जश्न में डुबा है वहीं दूसरी ओर एक शिक्षक परिवार गम के चादर में सिमट कर अपने भाग्य को कोश रहे थे। ये हालत सङक हादसे के शिकार दिव्यांग शिक्षक विवेक के परिजन का है ।शिक्षक की मौत शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या में अज्ञात मालवाहक बेलोरो पीकअप भान की चपेट में आने से हो गई। जब शिक्षक अपने ग्रामीण शिक्षक चन्देश्वर पासवान के साथ घर आ रहे थे, तभी वाहन ने अपना शिकार बना लिया। हलांकि आननफानन में ग्रामीण जन्दाहा के एक नीजि नर्सिंग होम इलाज के लिए ले गए, लेकिन तबतक उनकी मौत हो चुकी थी।

आज ग्रामीणों ने तङके सुबह जन्दाहा थाने के एन एच 322 चकफतह के निकट शव को बीच सङक पर रखकर जाम किया और वरीय पदाधिकारी को बुलाने की मांग करने लगे। जामस्थल पर प्रभारी थानाध्यक्ष बालेश्वर यादव और अंचलाधिकारी योगेंद्र सिहं दलबल के साथ पहुँकर ग्रामीणों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया। विवेक कुमार प्रखंड शिक्षक और उत्कमित मध्य विद्यालय चकफतह के प्रभारी प्रधानाध्यापक भी थे ।ग्रामीणों के मुताबिक विवेक शिक्षक दिवस के तैयारियों का जायजा लेकर विद्यालय से गुरु चौक पर चाय पीने के लिए आये थे और जैसे ही चाय पीकर घर जा रहे थे कि अनियंत्रित मालवाहक पीकअप भान ने हाँथ में लिए बैसाखी में जोरदार झटका मार दिया, जिससे वो संभल नहीं पायें और सङकों पर माथे के बल गिर गए।

गिरने से माथे में गंभीर चोट आई और खुन का अत्यधिक रीसाव होने लगा ।स्थानीय लोग इलाज हेतु जन्दाहा के नीजि नर्सिंग होम लेकर गए, लेकिन डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया ।साथ चल रहे शिक्षक चंदेश्वर पासवान को भी गंभीर चोट लगी है, जिनका इलाज पटना के किसी नर्सिंग होम में चल रहा है । क्रिकेटर से शिक्षक बने विवेक के जीवन में लगातार विपत्तियों का बज्रप्रहार होता रहा। बीस वर्ष पहले विवेक के दाहिने पैर में सुनापन आया। जिसका इलाज वो कराते रहे, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। परिणाम हुआ कि दोनों ही पैर सुख गया। विवेक के इन्हीं हालातों पर तरस खाकर एक ग्रामीण अपने हिस्से के शिक्षामित्र का पद त्यागा दिया, ताकि उसका भरणपोषण हो सके। लेकिन साथी के दया पर प्रकृति का कोप प्रभावी रहा और विपत्ति ने पीछा करना नहीं छोङा ।SHAKON

2003 में एक लालटेन विस्फोटक हुआ करता था,जिसकी शिकार होकर पत्नी तीन-तीन नन्हे बच्चे की जिम्मेवारी विवेक के कंधे पर छोङ कर दुनियां से चली गई। विवेक के तीन संतान है । बङी लङकी अंजनी बीए पार्ट 2 की छात्रा है,जबकि बेटा आदर्श और अंकित मैट्रिक तथा सातवीं का छात्र है । बदहवास होकर पिता की शाया से लिपटे तीनों संतान शायद अपने भाग्य को कोश रहा था कि आखिर किस गुनाह की सजा उसे प्रमात्मा ने दिया । बार-बार पापा-पापा कहकर बेहोश हो जाता ।बेटा अंकित हर किसी पर टकटकी नजर लगाये केवल यही कह पाता कि अब कौन होगा मेरा सहारा और वो बेहोश हो जाता ।

दिव्यांग शिक्षक विवेक की माली हालत अच्छी नहीं थी ।छोटे से खपरैल पुस्तैनी मकान में बच्चों के साथ गुजारा करता था ।वेतन ही उसके भरणपोषण का एकमात्र साधन था ,वो भी इस बढती मँहगाई में मात्र बीस हजार रुपये । उसी में बच्चों के पढाई-लिखाई भी थी । उपर से जवान बेटी को हाँथ पीला करने की जिम्मेवारी सामने पहाड़ सरीखे खङा था । ग्रामीणों के लिए बच्चों की परिवरिश चिंता का कारण था ।वो चाहते थे कि वरीय पदाधिकारी आकर अनुकंपा पर नौकरी देने और उचित मुआवजा की घोषणा करें। मुखिया पति लालदेव राम,यशवंत सिंह, नन्हकू, शीलवन्त, शेखर, अमरेश आदि का कहना था कि विवेक की हालत पर भगवान को भी रोना आ जायेगा, लेकिन ये पदाधिकारी सिर्फ ठगने में लगे हुए हैं ।

अंचलाधिकारी ने ग्रामीणों की एक टीम बनाकर वरीय पदाधिकारि से बात कराया। उन्होंने परिवारिक लाभ योजना के तहत मिलने वाले बीस हजार रुपये का चेक परिजन को दिया, जिसे ग्रामीणों ने यह कहकर लौटा दिया कि सङक दुर्घटना में मिलने वाले चार लाख रुपये का चेक दीजिए, ताकि इसका सहारा बन सके ।अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष बालेश्वर यादव ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चेक मिलने का अश्वासन देकर जाम हटवाया । जिसके बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए हाजीपुर गई। कई शिक्षकों ने सरकार पर प्रखंड शिक्षक के साथ भेदभाव का आरोप लगाया।

कहा कि प्रखंड शिक्षक को इस दुर्दशा पर लाने के लिए सरकार जिम्मेवार है। बीआरपी जाहिद आलम, शिक्षक संघ के प्रखंड अध्यक्ष मोहम्मद अकबर आदि ने कहा कि हमलोगों की जो इंसोरेंस राशि कटती थी, वो भी आज छह माह से बंद है। क्योंकि राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि जमा नहीं करती। शिक्षकों का मानना था कि यदि प्रखंड शिक्षक किसी हादसे के शिकार हो गए तब तो उनके परिवार लिए सङक पर आने के अलावे कोई दूसरा चारा नहीं बचेगा न। इनलोगों ने अपने किसी भी विभागीय अधिकारी के नहीं आने पर क्षोभ व्यक्त किया । शिक्षक विवेक जन्दाहा के चकफतह गांव के रहने वाले थे। जिनके मौत से इलाके में शोक का लहर दौड़ गया। भाजपा के पूर्व विधायक डॉक्टर अच्चुतानंद, जिलापरिषद सदस्या पति और भाजपा नेता लखेन्द्र पासवान, राजद नेता संजीव यादव, अरविंद राय, वात्सल्य आदि ने शिक्षक के असमायिक निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त किया है।

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