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साक्षरता कर्मी महासंघ प्रखंड तेघड़ा की बैठक सम्पन्न

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अभिषेक राय, तेघङा। साक्षर भारत के कर्मियों का 21 माह से लंबित मानदेय का भुगतान एवं बिहार सरकार के द्वारा संविदा पर बहाल साक्षरता कर्मियों को नियमित करने के साथ ही 21 मार्च 2018 के बाद सेवा विस्तार नहीं होने तथा जन शिक्षा के निर्देशक डॉक्टर विनोदानंद झा के द्वारा अखबार के माध्यम से साक्षरता कर्मियों के पद अस्तित्व में नहीं रहने जैसे बयान से मर्माहत एवं आश्चर्यचकित तथा आक्रोशित साक्षरता कर्मी महासंघ बिहार राज्य के द्वारा आगाज आंदोलन को मूर्त रुप देने हेतु साक्षरता कर्मी महासंघ तेघड़ा की बैठक संघ के संयोजक अशोक कुमार की अध्यक्षता में हुई।

आंदोलन को धारदार बनाने एवं सत्ता पर बैठे सरकार को अवगत कराने की रणनीति तैयार करते हुए संयोजक अशोक कुमार ने कहा कि 31 मार्च के बाद साक्षर भारत बंद करने का या कोई विस्तार का पत्र केंद्र या राज्य सरकार द्वारा नहीं दिया गया. 21 माह का मानदेय लंबित है आश्चर्य की बात है कोई भी कर्मी को पद से हटाने से 3 माह पूर्व उनको अवगत कराया जाता है उनकी व्यवस्था की जाती है लेकिन आश्चर्य की बात है इस तरह के बयान अखबार में देने से बिहार जैसे राज्य को शिक्षा और विकास की गति को आगे बढ़ाने में लगे कार्यकर्ताओं के मुंह पर तमाचा साथ ही यह राज्य और जनविरोधी कदम है इससे कर्मियों के मान-सम्मान पर कुठाराघात किया गया है।

जिससे कर्मी सदमे में है 21 मई से पूरे बिहार में चरणबद्ध आंदोलन के तहत प्रखंड से लेकर जिला स्तर की शिक्षा विभाग के कार्यालय में तालाबंदी प्रखंड से लेकर राज्य स्तर के पदाधिकारियों को मांग पत्र दिया गया साथ ही साक्षरता विरोधी जन निर्देशक का बड़े पैमाने पर पुतला दहन किया गया फिर भी निर्देशक अपने पद पर बने हुए हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि राजसत्ता दिशाहीन और नाकामी को छुपाना चाहती है लगता है । सरकार के इशारे पर इनके अधिकारी समाज में बदलाव लाना नहीं चाहता केवल वोट की राजनीति करती है। सरकार की जनहित में जागरूकता का जो भी काम होता है साक्षरता कर्मी अपनी जान की बाजी लगाकर उस को मूर्त रूप देती है. इस हालात को देखते हुए प्रतीत होता है।

सरकार दलितों और वंचितों के बीच केवल नारा देती है उनका विकास नहीं चाहती है अब दूसरे चरण के आंदोलन अवज्ञा आंदोलन के तरीके चरणबद्ध तरीके से 15 जून के पूरे बिहार के समाहरणालय को मानव श्रृंखला से घेरकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम करना है और सरकार की नाकामी को उजागर करना है दोहरे नीति को जनता के सामने लाना है और कटघरे में खड़ा करना है अगर सरकार आगे नहीं मानी तो 20 जून को पूरे बिहार के रोड और रेल को जाम किया जाएगा।

इस पर भी सरकार की आंखें नहीं खुली तो बिहार विधानसभा सत्र के दूसरे कार्य दिवस को पूरे बिहार की साक्षरता कर्मी एवं उनके सगे संबंधी और समर्थकों के साथ ही अन्य राजनीतिक दलों के सहयोग से विधानसभा का घेराव किया जाएगा जिसमें तेघरा प्रखंड की उपस्थिति एवं भागीदारी ऐतिहासिक होगी। बैठक में तमाम आक्रोशित कर्मियों ने सरकार के इस मानसा के खिलाफ एवं निर्देशक के विरुद्ध नारे लगाए और अपने कर्मियों के मान सम्मान एवं आर्थिक तथा मानसिक उत्पीड़न से मुक्ति हेतु सरकार से गुहार लगाई। बैठक को बैजनाथ महतो, गुंजन कुमारी, गणेश महतो, रामसीन सिंह, कुमारी अनुराधा, हीरालाल महतो, गीता देवी, रामप्रवेश, सुजीत कुमार एवम प्रभु नारायण शर्मा आदि ने नीति निर्माण में अपना महत्वपूर्ण सुझाव दिया।

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