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प्यार की पवित्रता कलंकित होकर वर्तमान पीढी को सबक देती हुई घटना

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शिशिर समिर, जन्दाहा। इस जमाने में प्यार की पवित्रता कलंकित होकर वर्तमान पीढी को सबक देती दिख रही है ।एक ओर प्यार में तङपता आशिक मौत के मुँहखाने चला जाता , तो कहीं आशिकी की निर्मम हत्या कर जमीनदोज कर दी जाती ।हालात को चाहे जिन मजबूरियों की संज्ञा दिया जाता हो, लेकिन होती निर्मल ,निश्छल और निष्कलंकित प्रेम के प्रतिपादक कृष्ण और राधा की निर्ममतापूर्वक हत्या ।जमाने की भूख को दोनों समानुपातिक ढंग से सफलता पूर्वक अंजामित कर प्यार की वास्तविक पवित्रता को कलंकित करते ।

आये दिन प्यार में मौत की खबरें आती रहती हैं ।कभी लङकीयाँ,तो कभी लङके की आत्महत्या । स्वभाविक रूप से प्यार की विफलता को सहन करने की क्षमता आम लोगों में नहीं है ।कृष्ण -राधा, रूकमणी-कृष्ण,कृष्ण-मीरा, दुश्यंत-शकुंतला, मछोदरी-शांतनु के साथ-साथ स्व जमाने की स्व पीङा इतिहास से लेकर वर्तमान जीवन में घटित होकर प्यार की त्रासदी को उल्लेखित करने के लिए काफी है ।

साथ जीने मरने की कसमें, देवी-देवताओं के दुहाई देकर प्रदत्त भरोसा,फिर नहीं बदली-बदला हूँ,पहले तुम ही हो, फिर मजबूरीयाँ का नाम, पुनः भूल जाओ मुझे और तुम्हारे मरने के चलते मैं कैसे अपना भविष्य करूँ खराब , मेरा-मेरी कसम है मेरे पति-पत्नी को कुछ नहीं बताना प्लीज,परिणाम आत्महत्या ।अरे वाह कैसा प्यार, किससे प्यार, कौन है प्यार, क्या दिया प्यार, यही न मौत ! अरे जालिम जमाने के शिकारी तुम ने प्रकृति की निर्मलता को भंग करने का जघन्य अपराध क्यों कर रहा ?क्या तुम्हें आनंदगामी जीवन का सर्टिफिकेट प्राप्त है ।कदापि नहीं !जिस दर्द से आशिक-आशिका का परिजन गुजर रहा, उसकी आह तुम्हारे चैन का हरणकर्ता बनेगा ।

आज का संदर्भ जन्दाहा थाना क्षेत्र के नरहरपुर मेंं स्नातक द्वितीय खंड की छात्रा प्यार की कोमली कृपा की निर्ममतापूर्वक हत्या कर जींदा जला देने के साथ-साथ विगत वर्ष प्यार की जाल में फँसा कर प्रेमिका द्वारा प्रेमी को दिल्ली और मध्य प्रदेश से बुलाकर सहदेई और लख्खीसराय में हत्या कर और करवा देने पर प्रकाश डालने से जुङी है ।संदर्भ कलुषित प्रेम की पीङा है, जो आशिक और आशिकी को सावधान करने के लिए है ।सावधान प्रेमी युगल जमाने की वक्र दृष्टि तुम पर है।

घटना रविवार की है। मिथलेश महतो की बेटी कृपा कुमारी कोचिंग के लिए निकलती हैं, लेकिन देर रात तक कमरे पर नहीं पहुँचती ।सहेलियों की व्यग्रता पिता तक संवाद करती है, लेकिन विधि की विडंबना कुछ और ही लिख डालती ।वो मौत के मुँह में जा समाई, वो भी प्यार की निश्छलता को कलंकित करनेवाले प्रेमी के हाँथों ।जघन्य कृत अंजामित होता ।तङपती कृपा को जींदा जला कर परिजन के अरमानों के इतिहास से दफन किया जाता ।प्याज की पवित्रता एकबार फिर कठप्रेमियों के हाथों कलंकित होता ।सवाल बनता, सवाल मिटता, लेकिन नहीं मिटता अरमानों की आह । इसलिए कहा जाता है कि या तो प्यार करो नहीं और यदि किया ही तो केवल हबस के शिकार तक सिमटने नहीं दो ।नहीं तो प्रकृति के कोख में उन आहों के लिए डंड निहित होगा, जिसे तुमने प्यार को कलंकित कर उपार्जित किया है।

प्रेम के जाल में फँसाकर स्नातक द्वितीय खंड की छात्रा का निर्ममतापूर्वक हत्या कर लाश को जला देने का मामला है । समस्तीपुर जिला के घटहो निवासी मिथलेश महतो की बेटी कृपा कुमारी 22वर्ष पटना में रहकर एकाउंट सेक्शन की तैयारी करती थी ।रविवार के देर शाम जब अपने कमरे में नहीं लौटी तो उसकी सहेल ने पिताजी को फोन से सूचना दी कि कृपा अभी तक नहीं आई है । खोजबीन के क्रम में नवीन कुमार पिता-राम एकवाल सिंह नरहरपुर निवासी पर संदेह हुआ ।जब उसके कमरे पर जाकर पता किया तो लङका कमरे पर से गायबा मिला । लङके के अन्य साथी भी फरार ।उसके घर का पता ठीकाना लेकर जब परिजन नरहरपुर पहुंचता है तो ग्रामीणों से मिली जानकारीयों ने पिता का होश उङा दिया ।लङकी के पिता को बताया गया कि एक अज्ञात लङकी की हत्या करने के बाद लाश को जला दिया गया है ।संभव है लाश अभी जल ही रहा हो, जाकर देख लीजिए।

लङकी की खोज में आए परिजन आननफानन में जन्दाहा थाना पहूँचकर घटना की सूचना दिया ।पुलिस घटनास्थल स्थल पहुँकर मिट्टी को खोदकर अधजली लाश को बरामद किया ।वहीं आरोपी के घर पर ताला लटका हुआ मिला ।

कृपा मिथलेश महतो के तीन भाई बहन मे सबसे बङी संतान थी ।बङी संतान होने के कारण माता-पिता की काफी स्नेह पात्र तो थी ही ,लेकिन परिवार के अरमानों की ताज भी थी ।पिता की इक्ष्क्षा थी कि बेटी पढ लिखकर ऑफिसर बने ।इन्हीं अरमानों को लिए प्राइवेट नौकरी करने के बावजूद मिथलेश महतो आर्थिक तंगी की परवाह नहीं करते हुए विगत चार साल से पटना के हॉस्टल में रखकर कम्पीटीशन की तैयारी करवा रहे थे ।
जानकर सूत्रों की माने तो लङकी के साथ ही पढने वाला जन्दाहा निवासी नवीन कुमार पिता-राम एकवाल सिंह से नजदीकी रिश्ता बन गई थी ।जो वाद में चलकर प्रेम प्रसंग में परिणत हो गया ।

दोनों एक-दूसरे के साथ जीने मरने का संकल्प लिया । जानकारी मिल रही इस बीच लङकी चार महिने की गर्भवती हो गई ।जब नवीन पर शादी के लिए दबाव बनाती तो नौकरी होने तक इंतजार करने के लिए बोलता ।लेकिन लङकी के साथ लोकलाज का मामला मुसिबत खङा कर रहा था ।इसी दौरान वो नरहरपुर आरोपी लङके के घर आयी जहाँ हत्या कर लाश को दफन कर दिया गया ।
नाम नहीं बताने की शर्त पर ग्रामीण कई राज को खोलते है ।ग्रामीणों के अनुसार लङकी लङके के पिता से काफी अर्जु मिन्नत कर जीवन दान देने की गुहार लगाती रही, लेकिन वो जालिम नहीं माना ।कही चारा नहीं देखकर लङकी विषपान कर ली,जिससे घबरा कर इसने उसे जिंदा जला दिया ।

फिलहाल अधजली लाश को पुलिस कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कारवाई में जुटी है ।एस आई राम बालक यादव ने घटना की पुष्टि कर दी है ।उनके अनुसार मामला प्रेमप्रसंग में लङके द्वारा हत्या कर साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से लाश जलाने से जुङा है । जिसकी अनुसंधान चल रहा है ,वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही हैं ।

लेकिन घटना कई सवालों को छोङ जाती ।पुलिस के लिए भी घटना चुनौतियों से भरा है ।सवाल क्या हत्यारों को पुलिस सजा दिला पायेगी ?क्या कृपा को इंसाफ मिलेगी ?क्या इंसाफ इस तरह के अपराधियों के अपराध पर नकेल कसने में कमयाब हो पायेगी ? क्या उन माता-पिताओं का अरमान पूरी हो पायेगी, जिसकी हत्या कर दी गई ?क्या प्यार निश्कलंकित हो पायेगा ? क्या हमारे नौजवान इन घटनाओं से सीख ले पायेंगे ? तमाम सवालों का जबाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में समाहित है ।

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