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पाक और मुहब्बत की धरती पर प्रपंच का मेघ हो रहा: नितेश कुमार चौधरी

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नितेश कुमार चौधरी, जन्दाहा। जहां हर्ष की फूलझड़ी अनंत तरंगें बिखेरती जश्न का तस्वीर दिखाती, वहां पर गम की तस्वीर खङी थी । आजादी के72वें स्वतंत्रता दिवस में भी वैशाली के जन्दाहा प्रखंड स्यंव को आजाद मानने की स्थिति में कतई नहीं थी । पाक और मुहब्बत की धरती पर प्रपंच का मेघ हो रहा था, जिसके एक-एक बूँदों से खुन टपक रहा था ।न दैव्य अर्चना काम आ रही थी, न इंसान की इंसानियत, चहुंओर पाखंड, प्रपंच, पश्चात, परिगमन और दुर्दान्त पराकाष्ठा अपना परचम लहराते हुए आजादी का शीलहरण कर लोकतंत्र को कुचल रहा था ।भय और भयानक का संयोजन संसय का पट खोलते हुए नफरत का जाल बिछा चुका था ।आखिर नफरत और भय के रहते कैसी आजादी ,ये सवाल बरबस हर किसी के मनमष्तिष्क में कौंध रहा ।
वजह साफ थी कि दो दिन पूर्व ही नवनिर्वाचित प्रखंड प्रमुख मनीष कुमार को झंडातोलन नहीं करने की लगातार मिल रही संदेशों के वाद दिनदहाड़े हत्या कर.दी जाती ।आखिर कौन जिंदगी का प्यारा इस जश्न का साक्षी बनना पसंद करेगा। परिणामतः भावना और भय दोनों ही प्रखंड मुख्यालय पर हावी रहा ।हर्ष के साथ स्यंव को गौरवान्वित मानकर झंडातोलन करने वाला कोई नहीं मिला ।

प्रखंड विकास पदाधिकारी के लिए किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई ।एक के बाद एक पंचायत समिति सदस्य को साहस कर झंडातोलन करने के लिए आगे आने का आग्रह किया और हौसला बढ़ाया, लेकिन उनकी हौसलाअफजाई मानो माघ मास की पछुआ हवा की झोंके की चपेटे में हिम हो गई हो । अंततः किन्हीं स्वतंत्रता सेनानी से झंडातोलन कराने की जूगात बैठाई जाने लगी,लेकिन तत्क्षण बुढे शेर ने दहाड़ लगाई कि ठहरो मनीष की शहादत बेकार नहीं जाने दी जायेगी,हत्यारों के भय से मनीष का अरमान पूरी होने से वंचित नहीं रहेगी और रसलपुर पुरूषोत्तम क्षेत्र संख्या17 के 65वर्षीय उमाशंकर चौघरी ने आँखों में आँसू लिए झंडातोलन की रस्म अदायगी कर मनीष के शहादत को सलाम किया । जहाँ न बैंडबाजों की धून थीऔर न ही जलेवीयाँ किसी का मुँह मिठा कर रहा था। केवल और केवल वंदे मातरम्,भारत मात की जय, शहीद मनीष अमर रहे के नारे गुंजायमान थी ।

मालूम हो कि दिनांक 14जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के वाद 02अगस्त को प्रमुख के हुए चुनाव में दुलौर निवासी मनीष ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अरनिया निवासी जय शंकर चौधरी को आठ मतों के भारी अंतराल से परास्त कर प्रमुख के कुर्सी पर कब्जा जमाया था ।हलाकि जयशंकर चौधरी ने सत्ता के गलियारे से लेकर अपराधियों तक के द्वार पूजन किया, बावजूद अपनी कुर्सी बचाने में नाकामयाब रहें । नतीजन मनीष को धमकी मिलने का दौर जारी हुआ और अंततः कार्यालय जाने के दौरान धात लगाये अपराधियों द्वारा दिनदहाड़े हत्या कर दी गई ।

वो भी वैसे जगह पर हत्या की गई, जहां पर तीन-तीन सुरक्षा गार्ड मौजूद थे ,बीस मीटर की दूरी पर विडिओ और सीओ कार्यालय है,तो 100मीटर की दूरी पर थाना मौजूद ।एक प्रकार से अपराधियों द्वारा प्रखंड के सीने पर गोली मार दी गई । अफरातफरी और आक्रोश व्याप्त होकर विभत्स रूप धारण करता ।समर्थकों द्वारा आगजनी और तोङफोर की घटना को अंजाम दिये जाने लगा, तो पुलिस द्वारा समर्थकों के सीने पर गोली बरसाईं जाती ।पुलिस गोली से सात-सात लोग गंभीर रूप से जख्मी होते, जिसमें से एक की मौत भी हो जाती है । समर्थकों के नग्न नृत पर पुलिस नृत प्रभावी होकर सुशासन को कलंकित कर देता ।पुलिस द्वारा सैकड़ों राऊंड गोलीयां बरसाई जाती, तो अपनी नग्नता को ढकने के लिए मिडिया कर्मी का कैमरा और मोबाइल छीन लिया जाता ,ताकि पुलिस की नग्नता जन नजरों से बंचित रहें ।

इन दृश्यों को जिन्होंने अपनी नजरों या टेलीविजन और समाचार पत्रों के माध्यम से देखा व सुना , उनका ह्रदय प्रखंड मुख्यालय के नाम पर सिहर जाता और यदि उन्होंने हिम्मत भी जुटाने का प्रयास किया, तो परिवार वाले जाने वाले जगह का नाम पूछकर रिश्ते की दिबार खङाकर जाने से रोक देते ।उनका स्पष्ट मानना होता है कि वहां पर अपराधियों और पुलिस के आतंक में किसी समय किसी की भी हत्या हो सकती । इसलिए अपने बच्चों के वास्ते नहीं जाना है ।आज पुलिस के पास आक्रोशितों के विरुद्ध लम्बी-चौङी आरोपों की श्रृंखला मौजूद हैं, लेकिन इन सवालों का जबाब देने में वो असमर्थ है कि सम्पूर्ण कारवाई की विडियोग्राफी क्यों नहीं कराई गई ? यदि आक्रोशितों ने गोली चलाई तो उसका फूटेज क्यों नहीं जारी किया जा रहा ? आखिर क्यों मिडिया के कैमरों को छीन कर विडियों डीलेट कर दिया गया ?आखिर क्यों ढाई घंटे तक सीसीटीवी फुटेज के लिये प्रतीक्षा करना पङा, फिर भी खाली हाँथ लौटने की नौवत आई ,जिसके चलते आक्रोश बढा ?मेरे समझ से शायद ही प्रशासन के इमानदार आत्मा में इसका कोई जबाव हो ।नतीजन जख्मी ही जख्मी और मौत का तांडव ।हाय रे सुशासन, कहां है सुशासन, क्या है सुशासन ,क्या यही न कि लोगों का राजनीति से मोहभंग हो ? क्या निश्कलंकित-निश्कंटित राज को दमनपूर्वक स्थापित करने का नाम ही तो सुशासन नहीं है।

संदर्भ के नायक पंचायत समिति सदस्य उमाशंकर चौधरी के साहस और जज्बात को आज सलाम करते हुए मुझे गर्व हो रहा है,जिन्होंने ने न केवल भयाक्रान्त महौल एवं जगहों पर झंडातोलन किया, बल्कि जन्दाहा के प्राचीर से मनीष के हत्यारों को स्पष्ट चेतावनी दे डाली कि तुम्हारी मंशा को कभी पूर्ण नहीं होने दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि किसी सुरत में मनीष के शहादत को बेकार नहीं जाने दिया जायेगा और अपराधियों के दुष्टता का मुहतोड़ जबाब भी दिया जायेगा ।
15अगस्त अमर रहे, वंदेमातरम ,शहीद मनीष-अमर रहें

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