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नियोजित शिक्षकों की बदहाल स्थिति का जिम्मेवार कौन

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नलिनी भारद्वाज, वैशाली। नियोजित प्रखंड और नगर शिक्षको को मार्च माह से वेतनमान नही मिल रहा है जिसके कारण इन नियोजित शिक्षको के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। खासकर जी ओ बी से मिलने वाले वेतनमान वाले नियोजित शिक्षको को काफी परेशानियों का सामना करना पर रहा है। यही नही इन शिक्षकों को पूर्व के एरियर राशि भी बकाया होने की सूचना मिली है और उस राशि के लिए शिक्षकों को BRC का चक्कर लगाना पर रहा है।

“भूखे भजन नही होइ गोपाला, लेलहुँ अपनी कंठी माला” वाली कहावत सही अर्थो में नियोजित शिक्षको के साथ लागू हो रही है।खासकर जी ओ बी से मिलने वाले बिदुपुर, राजापाकड़, देसरी, जन्दाहा एवं सहदेई प्रखंड और महनार नगर, हाजीपुर नगर सहित अन्य नगर शिक्षको को वेतनमान के लाले परे हुए है।सरकार द्वारा यदि वेतनमान भी दिया जायेगा तो एक से दो माह का। नियोजित शिक्षको को जहाँ एक ओर अधिकारियों एवं स्थानीय लोगों द्वारा भी दूसरे नजर से देखे जाते है। इन शिक्षको को समाज में ठेका वाला शिक्षक की संज्ञा दिया गया है। अवकाश ग्रहण करने के बाद भी इन्हें सरकार द्वारा कुछ भी राशि नही दिया जायेगा, जबकि विधायक और सासंद एक बार भी जीत जाते है तो उन्हें आजन्म पेंशन सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराये जाते है।

नियोजित शिक्षको की जो स्थिति वर्तमान समय में हो गयी है उसके कारण भविष्य में कोई शिक्षक बनना नही चाहेगा। इसी कारण योग्य शिक्षको की कमी भी होती जा रही है।सरकार द्वारा नियोजित शिक्षको को तिरछी निगाह से देखा जा रहा है जिसका कोपभाजन नियोजित शिक्षको को बनना पर रहा है।सरकार द्वारा समय समय पर प्रति माह वेतनमान देने की दावा तो किया जाता है, परन्तु सरकार के दावे खोखले साबीत हो रहे है।

नियोजित शिक्षको के प्रति सरकार का रवैया नही बदला तो आगामी चुनाव में भी इसका असर तो अवश्य पड़ेगा। जन प्रतिनिधियों की सुख सुविधा में कोई कमी नही होनी चाहिए परन्तु नियोजित शिक्षको को चपरासी से भी कम वेतनमान देने के बाद भी नियमित रूप से वेतनमान देने में सरकार को परेशानी हो रही है।

वही दूसरी ओर नियोजित शिक्षको से वोटर लिस्ट ठीक कराना, जनगणना करना, पशु गणना कराना, आर्थिक सर्वेक्षण कराना, यहाँ तक कि खुले में शौच न करने की जांच जैसे कई तरह के गैर शैक्षणिक कार्य भी अधिकारी गण धौंस देकर कराते है परन्तु उनके सुख सुविधा, मान सम्मान का थोड़ा भी ख्याल नही है। यदि स्थिति में सुधार नही हुआ तो एक न एक दिन नियोजित शिक्षको के द्वारा उग्र आंदोलन शुरू किया जायेगा तो 09सरकार को सोचने के लिए मजबूर होना पर सकता है।

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