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निगरानी विभाग के हत्थे चढ़ा रिश्वतखोर अमीन राम नरेश मित्रा

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नलिनी भारद्वाज, बिदुपुर, वैशाली।
बिदुपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय में गुरुवार की सुबह ही कार्यालय खुलते ही निगरानी विभाग की टीम ने दस्तक दे दी।निगरानी विभाग की टीम द्वारा 10 हजार रुपये रिश्वत लेते ही सरकारी अंचल अमीन राम नरेश मित्रा को दबोच रँगे हाथ लिया गया और उसे वाहन में बिठाकर पटना पूछताछ के लिए ले गयी।वही निगरानी विभाग टीम के सदस्यो के द्वारा अंचल कार्यालय के कर्मी से भी पूछताछ किया गया और रिकॉर्ड को भी देखे जाने की सूचना है।

निगरानी विभाग टीम का नेतृत्व डी एस पी विनय कुमार सिंह कर रहे थे।उनके साथ इंस्पेक्टर ईश्वर प्रसाद और जहांगीर अंसारी सहित अन्य कर्मी भी थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार अंचल अमीन मित्रा सहदुललहपुर धबौली निवासी हरि भगवान शर्मा से 10 हजार रुपये जमीन मापी और रिपोर्ट के लिए मांगा था जिसकी शिकायत उसने निगरानी विभाग से कर दिया।

उसके शिकायत पर निगरानी विभाग की टीम ने गुरुवार को जाल फैलाया। निगरानी विभाग की टीम को जानकारी थी की मित्रा गुरुवार एवम शुक्रवार को बिदुपुर सप्ताह में दो दिन ही आते है और वे निजी अमीन से मापी का कार्य कराते है। वही निगरानी विभाग को यह भी जानकारी थी की वह राघोपुर भी नही जाता है और हाजीपुर गाँधी आश्रम स्थित एक निजी कार्यालय से कार्य का निपटारा करता है।

मित्रा को दबोचने के बाद निगरानी विभाग के इंस्पेक्टर ईश्वर प्रसाद ने काफी देर तक अंचल कार्यालय में रुक कर कर्मियों से भी जानकारी ली और रिकॉर्ड भी देखा। इधर गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही दफ्तर के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों में हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। सभी पदाधिकारी कार्यालय से फरार दिखे। स्वच्छता अभियान के ब्लॉक कॉर्डिनेटर के ऑफिस में ताला लगा दिखा। यहाँ तक कि प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी अंचलाधिकारी दुनिया लाल यादव भी अपने दफ्तर में नही दिखे हालांकि उनकी सरकारी गाड़ी अंचल कार्यालय प्रांगण में हीं दिखी।

इस संबंध में श्री प्रसाद ने बताया की अंचल अमीन के द्वारा रिश्वत लेने की शिकायत पर यह कार्रवाई किया गया है।

आपको बताते चलें कि अमीन मित्रा प्राइवेट अमीनो द्वारा मापी करवाता था और सिर्फ खुद उस पर सिग्नेचर करता था। बिदुपुर अंचल कार्यालय की कानून व्यवस्था काफी लचर है यहां काफी पुराना पुराना भूमि विवाद का मामला कार्यालय के धूल में दफ़न हो रही है। कार्यालय दलालों का अड्डा बना हुआ है और पदाधिकारी मूक दर्शक बने है। आवास हो या जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड हो या दाख़िल ख़ारिज का मामला या फिर जमीन मापी का हर जगह कार्यरत कर्मचारी-पदाधिकारी पद की गरिमा को धूमिल करते हुए रीश्वत की मांग करते हैं जिसका जीता जगता उदाहरण अमीन मित्रा हैं जिन्हें निगरानी विभाग के हत्थे चढ़ना पड़ा।

 

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