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न्यू इंडिया बजट से संतुलित विकास को मिलेगी रफ्तार

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आलेख : कमलेश पांडे, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार। ‘सबका साथ-सबका विकास’ चाहने वाली और ‘नए भारत’ का सपना संजोने वाली मोदी सरकार ने संसद में पेश अपने  आखिरी पूर्ण बजट के सहारे देशवासियों में यह एहसास जगाने में कामयाब रही कि उसकी स्वच्छ-पारदर्शी नीतियों व उदार पहल से राष्ट्रव्यापी सन्तुलित विकास को जो गति मिली है, वह आगे भी जारी रहेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को न्यू इंडिया का आम बजट 2018-19 प्रस्तुत करके जिस नए भारत की प्रगतिशीलता का खाका स्पष्ट किया, उसके गहरे राजनैतिक और आर्थिक निहितार्थ हैं।

इस बात से सभी वाकिफ हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद का यह पहला और नोटबन्दी के बाद का दूसरा आम बजट है जिसमें सरकार जनहित और राष्ट्रहित दोनों का समान रूप से ख्याल रखने में सफल रही है। यही नहीं, समाज के विभिन्न वर्गों, पेशेवर समूहों और अर्थव्यवस्था के सभी महत्वपूर्ण घटकों के बीच उन्होंने जैसी बारीक आर्थिक कारीगरी की है, उससे सभी प्रसन्नचित्त हैं कि सरकार ने उन्हें कम या ज्यादा नहीं, बल्कि  सही तवज्जो दी है।

कहना न होगा कि देश के संघात्मक स्वरूप की नैतिक व आर्थिक जिम्मेवारियों को समझते हुए सभी राज्यों व केंद्रशासित क्षेत्रों बीच परस्पर हितसाधक संतुलन बनाये रखने की जो उन्होंने पहल की और इस हेतु अपेक्षित बजट तारतम्यता बनाये रखने के लिये समुचित बजटीय प्रावधान किए, उससे  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गदगद हो गए। उनके मंत्रिमंडल के अन्य लोगों को भी जेटली की यह आर्थिक कारीगरी बहुत पसन्द आई। विपक्ष के औपचारिक विरोध को छोड़कर बीजेपी और उसके गठबंधन साथियों ने भी इसे सराहनीय बताया। कइयों ने तो खुले तौर पर इसका इजहार भी किया।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि सबके लिये रोटी, कपड़ा और मकान तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक की जरूरतों को भी सरकार समझ रही है। उसने जिस तरह से कृषि, रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य को आशातीत बढ़ावा दिया और परिवहन, उद्यमिता, बिजली, पेयजल, स्वच्छता और ईंधन की भावी आवश्यकता को समझते हुए इस क्षेत्र में विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने की ठानी है, उसका विशेष महत्व है। उसने बाजारू उत्पादन से जुड़ी इच्छाओं, कतिपय विशेष अपेक्षाओं पर भी फोकस किया है। यह सब महत्वपूर्ण निर्णय है। इससे मंहगाई नियंत्रित होगी और आधारभूत संरचनाओं समेत विविध क्षेत्रों में समावेशी और टिकाऊ विकास को बल मिलेगा।

कहना न होगा कि मोदी सरकार का यह अंतिम पूर्ण बजट था, इसलिये मिशन 2019 की छाया भी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हुई।
सच कहा जाये तो केंद्र सरकार की बदली कार्यसंस्कृति, व्यवहारिक व दूरदर्शी आर्थिक नीति और आक्रामक विदेश नीति का अतिरिक्त असर भी ताजा बजट में देखा गया। विगत लगभग चार वर्षों में सरकार ने जिस तरीके से नौकरशाही की तमाम बारीकियों को समझते हुए उसकी अधिकांश उलझनों को सुलझाने की सफल कोशिश की और नए भारत के निर्माण की प्रतिबद्धता जताई, उससे भी समग्र सोच और समयबद्ध विकास को गति मिली है। लोग सरकार की दूरदर्शिता और नेकनीयती से अनुप्राणित हैं, और राष्ट्र के नवोत्थान हेतु हर तरह की कुर्बानियों के लिये तैयार भी। इस बात की झलक भी ताजा बजट से मिलती है।

यह सही है कि कुछेक नई योजनाओं, प्रावधानों को छोड़कर नए बजट में भी सरकार विगत तीन वर्षों में अपने द्वारा चलाई हुई कतिपय महत्वपूर्ण योजनाओं के इर्दगिर्द ही घूमती नजर आई। लेकिन जिस तरह से उसने इसकी उपयोगिता बताई और उपलब्धि के आंकड़े प्रस्तुत किये तथा पूर्व के तय कार्य लक्ष्यों में आशातीत बढोत्तरी की, उससे यह स्पष्ट हो गया कि सरकार के विकास-दर्पण में सभी को अपना चेहरा दिखाई पड़ रहा है। न तो उनकी खुशी छिप रही है और न ही अक्स ओझल हो रहा है। फिर भी जो, जहाँ, जैसे व जिस भी हाल में है, सन्तोष करके सुनहरे भविष्य के प्रति आशान्वित नजर आ रहा है।

जरा सोचिए, सरकार ने आयकर सीमा में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 40 हज़ार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी दे दिया, यानी कि जिसका जितना वेतन है उसमें से 40 हज़ार रुपये घटाकर जो रकम बचेगी, सिर्फ  उस पर ही टैक्स लगेगा। साथ ही, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सेस 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया। स्वाभाविक है कि सरकार एक हाथ से देने और दूसरे से लेने में माहिर हो चुकी है। इसलिये एक लाख रुपये से अधिक के निवेश पर 10 प्रतिशत कैपिटल गेन टैक्स भी थोप दिया।

अब भले ही मोबाइल व टीवी उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी 15 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे मोबाइल व टीवी महंगे होंगे। स्वाभाविक है कि इससे युवा वर्ग की जेब ढीली होगी, लेकिन सरकार ने 70 लाख नई नौकरियां बनाने का लक्ष्य घोषित करके लगभग उन्हें शांत रखने की पहल कर डाली। बेशक, आठ करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने, नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम के तहत 10 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक का हेल्थ बीमा
देने का फैसला करके सरकार ने गरीबों को लुभाने की पहल की है। साथ ही, किसानों को भी उनकी फसल पर लागत का डेढ़ गुना दाम देने की चाल चलके उन्हें रिझा ली है।

बजट मसौदे के मुताबिक, अब राष्ट्रपति की तनख्वाह पाँच लाख रुपये, उपराष्ट्रपति की चार लाख रुपये और राज्यपाल की तनख्वाह साढ़े तीन लाख होगी। इतना ही नहीं, सांसदों का वेतन भी बढ़ेगा तथा हर पांच साल में सांसदों के भत्ते की समीक्षा भी  होगी। इसका मकसद है कि जब जनप्रतिनिधियों को उचित वेतन व सुविधाएं मिलेंगी तो वो लोकसेवा में मन लगाएंगे और भ्रष्टाचार से गुरेज करेंगे। लगता है कि इसकी भरपाई के लिये सरकार ने 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत टैक्स निर्धारित कर दिया है।

वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि उनकी सरकार की नेक पहल से  बाजार में कैश का प्रचलन कम हुआ है, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था पटरी पर है और भारत दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगी। स्वाभाविक है कि यह नोटबंदी और जीएसटी की सफलता है। सरकार ने कुछ और नए उपाय किये ताकि अर्थव्यवस्था को गति मिले। अब वह नए कर्मचारियों के ईपीएफ में 12 फीसदी अंशदान देगी और 70 लाख नई नौकरियां भी पैदा करेगी।

सरकार को अपनी नीतियों पर फक्र है कि पिछले 3 सालों में औसत विकास दर 7.5 प्रतिशत पहुंची है और भारतीय अर्थव्यवस्था 2.5 ट्रिलियन डॉलर की हो गई है। टैक्स पेयर बेस 2014-15 के 6.47 करोड़ से बढ़कर 2016-17 में 8.27 करोड़ हो गया है, जिससे सरकार उत्साहित है। 2018-19 में वित्तिय घाटा जीडीपी का 3.3% रहने का अनुमान है।
सरकार ने अब यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिटक्वाइन जैसी करेंसी अब नहीं चलेगी और क्रिप्टोकरेंसी की जगह ब्लॉकचेन की तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा।

यही नहीं, सरकार 2022 तक किसानों की आय भी दोगुनी करेगी। इसके लिये न्यूनतन समर्थन मूल्य 1.5 गुना बढ़ाने का एलान किया गया है। खरीफ का समर्थन मूल्य भी उत्पादन लागत से डेढ़ गुना होगा। नया ग्रामीण बाजार ई-नैम बनाने का एलान किया गया है। किसानों को पूरा एमएसपी देने का भी लक्ष्य है, जबकि जिलेवार खेती का मॉडल भी तैयार किया जाएगा। सरकार द्वारा 42 मेगा फूड पार्क भी बनाए जाएंगे। आलू, टमाटर और प्याज के लिए सरकार 500 करोड़ रुपए देगी। अब पशुपालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड मिलेगा। 1290 करोड़ रुपए से बांस मिशन चलाया जाएगा। खेती के कर्ज के लिए 11 लाख करोड़ मिलेंगे। सरकार 4 करोड़ गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन देंगी और 2 करोड़ शौचालय भी बनाए जाएंगे। आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य स्कूल खोलेंगी सरकरा। प्री-नर्सरी से 12वीं तक पढ़ाई के लिए एक नीति होगी। सरकार द्वारा 24 नए मेडिकल कॉलेज भी खोले जाएंगे। जबकि, टीबी मरीजों के लिए 600 करोड़ रुपए की स्कीम चलाई गई जिसके तहत टीबी मरीज को हर महीने 500 रुपए देंगे।

सरकार ने व्यापार शुरू करने के लिए मुद्रा योजना में 3 लाख करोड़ का फंड दिया, जिसमें से छोटे उद्योगों के लिए 3,794 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अब उज्जवला स्कीम के तहत 8 करोड़ महिलाओं को गैस कनेक्शन मिलेगा और 2 करोड़ शौचालय बनवाने का लक्ष्य भी रखा गया है ताकि स्वच्छता मिशन पूरा हो।सरकार 2022 तक सबको घर देने को भी प्रतिबद्ध है। स्मार्ट सिटी के लिए 99 शहर चुने गए हैं। सीमा पर सड़कें बनाने पर भी जोर है। धार्मिक-पर्यटन शहरों के लिए हेरिटेज सिटी की योजना है। सरकार अनुसूचित जाति कल्याण के लिए 56,619 रुपए, अनुसूचित जनजाती के लिए 39,135 रुपए की राशि का भी आवंटन करेगी, ताकि इस वर्ग की भी उन्नति हो।

नई घोषणा के मुताबिक, अब 99% एमएसएमई को मात्र 25% टैक्स ही देना होगा। जबकि, 100 करोड़ के टर्नओवर वाली कृषि उत्पाद बनाने वाली कंपनियों का 100% टैक्स माफ किया जाएगा। अरुणाचल प्रदेश में सी-ला पास के पास टनल बनाने के भी प्रस्ताव है। अब देशभर में आयकर का आकलन ऑनलाइन होगा। साथ ही, गोल्ड डिपॉज़िट अकाउंट खोलने में लोगों को आ रही दिक्कतों को भी दूर किया जाएगा। इसके लिये मुद्रीकरण स्कीम को भी नए सिरे से ठीक किया जा रहा है। औद्योगिक विकास को गति देने के लिये देशे में दो इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिसके जरिए पब्लिक-प्राइवेट दोनों ही सेक्टर्स में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि ख़ुशहाली निरन्तर बढ़ती रहे।

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