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सम्मान मिलने की बाट जोह रहा सुकमा नक्सली हमले में शहीद अभय का परिजन

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रिपोर्ट: शिशिर समीर, जन्दाहा। कफन सबों को नसीब होता है, लेकिन तिरंगा का कफन हर किसी को नहीं! हमें सम्मान प्यारा है, पैसा नहीं, जो सम्मान मिलना चाहिए था, वो शहादत के दस माह बीत जाने के बाद भी नहीं मिला।

आशा तो आज भी है, लेकिन संभावना छिन्न दिखाई देती है और ये इसलिए कह रहीं हूँ कि बहुत सारे पदाधिकारी, नेता, मंत्री आये और कई सारी घोषणायँ किए ,लेकिन जमीन पर हकीकत में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है, यहाँ तक कि राज्य सरकार से उचित सम्मान नहीं मिला और आहत हमारे परिजन जो अनुदान की राशि लौटा दिए, उसे देने के लिए पुनः कोई पूछने तक नही आया और अब जानकारी मिल रही है कि जिला प्रशासन ने सरकार को प्राप्त होने की रिपोर्ट दिया है ।मैं नाउम्मीद तो नहीं हूँ, लेकिन सैनिक सम्मान से अनभिज्ञ राज्य सरकार और उसके प्रशासन से उम्मीदें भी कम है ।

ये वाक्या लोमा निवासी 24-04-2017 को सुकमा नक्सली हमले में शहीद अभय की पत्नी तन्या की है । शादी के महज 11 माह बाद ही पति के शहादत झेलने वाली शहीद पत्नी तन्या का नम आँख आज भी नहीं सुखा है ।उनकी आँखें आज भी पति से बात कर रही है । कभी हर्षित मन देशभक्ति का कर्तव्य देख रहा होता है, तो कभी जीवन के श्रृंगार का विलुप्त रूप की परिकल्पना को साकार पाकर व्यथित हो जाता है। लेकिन इन सब के बावजूद देश के लिए शहादत देने वाले पति पर गर्व है तन्या को ।

24 अप्रैल को जैसे ही अभय के शहादत की खबर आई थी, सम्पूर्ण इलाके में मातम का महौल छा गया था और लोगों की जमाबरा वैशाली जिला के बरैला  तटबंध पर अवस्थित लोमा गांव(तिसिऔता) में लगना शुरू हो गया था ।जैसे ही शहीद अभय की पार्थिव शरीर जन्मधाम पर पहुँचा, तो हर कोई देश के लिए शहादत देने वाले अपने अमर सपूत का एक झलक पाने को बेचैन था ।अंतिम संस्कार के लिए गंगातट महनार जाने के क्रम में सड़क के दोनो दिशा न केवल लोगों की भीड़ से पटी थी, बल्की ढोल-ताशे से राष्ट्रीय धुन पर गुंजायमान स्वर और फूलों की बारिश हर किसी के दिल में देशभक्ति की जज्बा जाग्रृत कर रहा था तो आतंकवादीयों के प्रति आक्रोश भी ।

नेता , मंत्री और पदाधिकारीयों ने शोकाकुल शहीद परिजन को सांत्वना देने में कोई कोताही नहीं बरती, कई घोषानाएँ भी की । घोषनाओं में शहीद पथ, शहीद द्वार और शहीद स्मारक भी थी, लेकिन किन्हीं घोषनाओं पर आजतक अमल नहीं हुआ ।यहाँ तक कि सम्मान के भूखे शहीद परिजन से मिलने राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि तक नहीं आया , जबकि चर्चाएँ थी कि एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री शहीद को माल्यार्पण करेंगे, लेकिन वो नहीं गए, जिससे लोगों में काफी नाराजगी थी ।

परिणातः राज्य सरकार की ओर से पाँच लाख का चेक लेकर आए विडिओ जन्दाहा और एसडीओ महुआ को यह कहकर लोगों ने लौटा दिया था कि जो सरकार हमें सम्मान नहीं दे सकती, उसका अनुदान हमें स्वीकार नहीं है । लोगों को गुस्सा इस बात से भी थी कि शराब पीकर मरने वालों को सरकार चार लाख रुपए देती है और देश के लिए शहादत देने वाले को भी उसी दर्जे में रख रही है । वर्तमान उपमुख्यमंत्री शुशील कुमार मोदी जो उस समय विपक्ष के नेता थे, ने भी सरकार की निंदा करते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की थी ।महज संयोग है अब वो उपमुख्यमंत्री है, इसलिए परिजन को उनसे काफी उम्मीद बनी हुई है ।वो उनसे न्याय और सम्मान की आशा कर रहे है ।

समय बीतने के बाद लोगो और परिजन का आक्रोश थमा और शहीद पत्नी के भविष्य का ख्याल रखते हुए अनुदान की राशि स्वीकार करने की बात कही ।प्रशासन को इसकी जानकारी भी दी गई ।लेकिन दस माह बीतने के बाद भी सुधी लेने को कोई तैयार नहीं है और अब जो शहीद परिजन को जो जानकारी मिल रहीं है वह बेहद चौकाने वाली है ।शहीद परिजन के मुताबिक जिला प्रशासन ने राशि तो दी नहीं और सैनिक कल्याण बोर्ड के पत्राचार में मिलने का जिक्र किया है । बतौर शहीद अभय के चाचा अवधेश चौधरी ने बताया कि जैसे ही इसकी जानकारी मुझे मिली है हमने एसडीओ साहब से बात की तो उन्होंने भी इस बात की पुष्टि करते हुए जल्द समाधान की बात कहा. लेकिन उस अस्वासन का भी कई माह गुजर गए । परिजन को किन्हीं से कोई शिकायत नहीं है, यदि देते है तो वो स्वीकार करने को तैयार है ।चुकि उस समय लोग संतान खोने के दर्द में थे, जो भयानक विचलन पैदा किए हुए था ।

अब सवाल उठता है कि क्या देश के नागरिकों सहित हुक्मरानो को अपनी शहादत देकर निश्चिंत नींद देने वाले सैनिकों के साथ भी प्रपंच का खेल होता है, क्या सैनिकों के साथ हो रहे छल से नौजवानों में देशभक्ति की जज्बा आ पायेगी ? इसलिए शहीद परिजन को सांत्वना देने वाले उस समय के विपक्ष के नेता और वर्तमान उपमुख्यमंत्री से शहीद परिजन ने वादे का ख्याल कराते हुए न्याय की मांग किया ।शाहिद परिजन उन सभी धोषणाओं पर अमल का आग्रह किया है , जिसमें शहीद पथ, शहीद द्वार और शहीद स्मारक है, ताकि शहादत के प्रथम वर्षगांठ पर अमर शहीद अभय को नमन किया जा सके, जिससे नौजवानो में देशभक्ति का जज्बा पल्लवित हो । मामला शहीद अभय कुमार जो ग्राम लोमा, थाना -तिसिऔता “वैशाली” के परिजन को सांत्वना राशी नहीं मिलने का है ।

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