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आक्रोशित त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधि ने चरणवद्ध आंदोलन शुरू

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नितेश कुमार चौधरी, जन्दाहा। प्रखंड प्रमुख मनीष कुमार साहनी के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं से आक्रोशित त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधि ने चरणवद्ध आंदोलन शुरू कर दिया । आंदोलन जन्दाहा पंचायत समिति सदस्य संघ के आह्वान पर किया गया ।जिसमें त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि और आमलोगों ने हाथ में मशाल लिए मनीष कुमार साहनी अमर रहे,हत्यारों को अविलंब गिरफ्तार करो,साजिशकर्ता को गिरफ्तार करो,नहीं चलेगी प्रशासनिक शिथिलता आदि आक्रोशपूर्ण नारे लगाते चल रहे थे ।मशाल जुलूस योगी स्थान चकमहदीन पेट्रोल पंप से शुरू होकर प्रखंड मुख्यालय, थाना, जन्दाहा बाजार मुनेश्वर चौक भ्रमण करते पुनः वहीं पर आकर समाप्त हुआ । मशाल जुलूस में पूर्व विधायक डॉक्टर अच्चुतानंद, पूर्व प्रमुख रामनाथ रमण, राजद नेता दिलीप राय, अखिलेश शर्मा ,मनीष कुमार भाजपा अध्यक्ष वात्सल्य ने शिरकत किया । जुलूस का नेतृत्व संघ के अध्यक्ष प्रवीण कुमार पुष्पम कर रहे थे, जबकि काफी संख्या में मुखिया, सरपंच, और वार्ड-पंच संघ के अध्यक्ष जुलूस को नियंत्रित कर आगे-आगे ले चल रहे थे ।

जुलूस का केंद्र मनीष साहनी के भाई ओमप्रकाश और रजनीश की ममस्पर्सी वेदना थी, जिसे सुनकर हर ह्रदय रो रहा था ।बतौर ओमप्रकाश भाई बकरे की चोरी होते चोर हवालात में होता है और मेरे भाई के हत्या के दसवें दिन भी अपराधी गिरफ्तार नहीं हो सके ।गिरफ्तारी तो जाने दीजिए किसी संदिग्ध से पुलिस पूछताछ करने की हिम्मत नहीं जूटा पाई, तो आखिर कैसे उम्मीद करूँ कि हत्यारा गिरफ्तार भी होगा ।अब हमारी विश्वास नीतीश कुमार के शासन और प्रशासन से समाप्त हो गया है ।

बहुत उम्मीदें थीं नीतीश कुमार जी पर ,लेकिन अब नहीं ,अब तो हमारे पास पुलिस और अपराधियों की गोली खाने से अच्छा भूखे-प्यासे आत्मत्याग का रास्ता ही बचा है ।इसलिए सम्पूर्ण परिवार प्रखंड मुख्यालय पर आमरण अनशन कर भूखे-प्यासे आत्मत्याग कर देंगे, ताकि अपने भाई की आत्मा को न्याय के लिए तङपते तो नहीं देखुंगा ” ! काश पीङितों के इस दर्द का एहसास सुशासन के रहनुमा को होता ।ऐसा कहकर और सोंचकर में सम्मिलित हजारों लोगों के नयन द्व पीङा की अश्रु श्रावित करने लगी ।अपने संतान पर गर्व की अनुभूति झलक रही थी, तो शासन-प्रशासन के कृतों पर आक्रोश की ज्वाला धधक रही थी ।एक ही नारा मनीष साहनी अमर रहे, हत्यारेऔर साजिश कर्ता को अविलंब गिरफ्तार करो,प्रशासन नहीं चलेगी, तुम्हारी शिथिलता, न्याय को जबाब दो का गुंज प्रलय के आँधी को शायद भरोसा दिला रहा था कि न्याय मिलेगी और जरूर मिलेगी ।

संघ के अध्यक्ष प्रवीण कुमार पुष्पम ,मुखिया धनराज राय, विनोद रजक, विनोद चौरसिया, राकेश कुमार, जितेंद्र जेपी, राजेंद्र, जितेंद्र, बबलु, संतोष ,चंदु साह,सरपंच रामसागर साह,गणेश पासवान, सुबोध चौधरी, मनीष कुमार, शिक्षक अभाष रंजन, राजीव आदि ने कहा प्रशासन जाँच के नाम पर मामले की लीपापोती करने में जुटी हैं ।आखिर प्रशासन किस जाँच की बात करती हैं ,क्या बिहार का प्रशासन अंतरध्यान से सब कुछ ज्ञात कर रही हैं ? घटना के दसवें दिन भी गिरफ्तारी को छोङीये, किसी पूछताछ तक नहीं की है ।आखिर कैसे भरोसा हो इस शासन और प्रशासन पर ।

BDO प्रमुख को हिटलर की तरह फोनकर अपने आवास पर बुलाया और ड्राइवर के भरोसे भेज दिया तथा विडिओ की गाङी प्रमुख को उतार कर घुमता और उसकी हत्या हो जाती ।आश्चर्य तो तब होती है कि हत्या के वाद विडिओ का दर्शन दूर्लभ हो जाता ,जबकि उसके प्रमुख की निर्मम हत्या हो जाती ।ये विडिओ आरोपियों संग संवाद में मशगूल रहा ।कई फोटो आरोपी और विडिओ की सोशल मीडिया पर आज भी मौजूद हैं ।फिर भी आजतक उससे पूछताछ तक नहीं की गई ।आखिर ये विलुप्त होने वाले हत्यारे और साजिश कर्ता तो कहीं घरती पर अवतरण नहीं कर गए, जो पुलिस को ढूंढने से भी नहीं मिलता ।

इन हालातों ने जन्दाहा के जनप्रतिनिधि सहित आम-अवाम में भय व्याप्त दिया हैं।कहीं से भी कोई सुरक्षित नहीं दिखाई देता । हमलोगों ने मान लिया है कि मेरे प्रमुख की हत्या सत्ता के गलीयारों से परिसिंचित है,जिसमें इस निकम्मी प्रशासन के बदौलत न्याय मिलना संभव नहीं है ।इसलिए हम सङकों पर आने को मजबूर हुये और जनांदोलन का आज शंखनाद किया है ।ये आंदोलन न्याय प्राप्ति तक चिरायु है ।भलें ही इसके लिए अनगिनत गुलशन को और कुर्बानी क्यों न देना पङे ।

बतौर पूर्व विधायक डॉक्टर अच्चुतानंद ने कहा कि निश्चित तौर पर प्रशासन निष्क्रिय दिखाई दें रही हैं ।पीङितों का आरोप सत्य प्रतीत होता ।ऐसा लगता है कि मानों सत्ता की धमक प्रशासन पर है, लेकिन मनीष मेरा औलाद था, जिसकी निर्मम हत्या स्थानीय विधायक ने साजिश रच कर करा दी। इस हत्या में जन्दाहा विडिओ भी संलिप्त है। इसलिए जबतक एक-एक आरोपी और साजिश कर्ताओं की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, हम प्रशासन को चैन से नहीं बैठने देंगे। हर हाल में न्याय लेकर रहेंगे।

आखिर अब सवाल उठता है कि प्रशासन सत्ता के दबाव में तो नहीं आ गई, जो आरोपी और संदिग्धों तक से पूछताछ नहीं कर सकी ।इसलिए प्रशासन की शिथिलता संदिग्ध प्रतीत होती । यदि प्रशासन की यही हालात बनी रही,तो आने वाले दिनों में आक्रोश के तुफान को रोकपाना प्रशासन से काफी दूर चली जायेगी ।आवश्यकता है अविलंब आरोपियों के गिरफ्तारी की, ताकि आमजनमानस में भरोसा की नई किरण जग सकें ।

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