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लोगों के विवेकशील को बाहर निकालना ही ज्ञानता : कुलपति

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अभिषेक राय, तेघड़ा। ज्ञान का मतलब लोगों के भीतर की विवेकशीलता को बाहर निकालना है। प्रत्येक लोगों का अंतिम यथार्थ मुक्ति पाना ही है चाहे वह कवि मुक्तिबोध हो या सुदूर गांव में शिक्षा से वंचित समाज। यह बात ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सुरेंद्र कुमार सिंह ने कही।

आरबीएस कालेज तेयाय में गुरुवार को कालेज के संस्थापक रामविलास शर्मा की 38 वीं पुण्य तिथि पर कहा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा पहुंचाना और लोगों को अज्ञानता से मुक्त करना सराहनीय पहल है।

मौके पर हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा आयोजित सेमिनार में मुक्तिबोध त्रिलोचन का काव्य और हमारा समय विषय पर सेमिनार आयोजित में कहा कि जैसे निराला ने तुलसी की आंखों से राम का दर्शन किया उसी तरह मुक्तिबोध ने निराला की आंख से तुलसीदास को देखा। उन्होंने कहा कि मुक्तिबोध आधुनिक भारत का सबसे क्रांतिकारी कवि हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि उनकी कोई रचना उनके जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हो सकी।

डाॅ चन्द्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि अंधेरे में कविता उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना मानी जाती है जिसमें उन्होंने राजनीतिज्ञों, बुद्धिजीवियों और प्रशासनकों के गठजोड़ पर प्रहार किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता शासी निकाय के सचिव व पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने मुक्तिबोध की कविता पाठ कर किया जबकि हिन्दी विभाग के अमरनाथ शर्मा अतिथियों का स्वागत किया।

इससे पूर्व लोगों नें शहीद रामविलास शर्मा की स्मारक पर फूल माला चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। मौके पर तेघड़ा के पूर्व विधायक ललन कुंवर, सच्चिदानंद सिंह हितलाल पाठक, सच्चिदानंद पाठक सहित कालेज के सभी शिक्षक मौजूद थे।

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