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जन्दाहा में एससीएसटी एक्ट के विरोध में भारत बंद का व्यापक असर देखने

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नितेश कुमार चौधरी, जन्दाहा। जन्दाहा में एससीएसटी एक्ट के विरोध में भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला ।बंद समर्थकों ने एन एच 323 झम्मनगंज पुल को जाम कर यायतायात अवरुद्ध किया और आगजनी करते हुए जमकर नारेबाजी की। बंद समर्थक के निसाने पर सरकारी दफ्तर भी रहा, जिसे कार्यालय कर्मी को बाहर निकाल कर बंद कराया। बंद का असर गांव देहात के विभिन्न चौराहों सहित जन्दाहा गांधी चौक, कुशवाहा चौक, लोमा बिंदी चौक, गुरु चौक, कल्याणी, अँधराबङ, शाहपुर, सुरेश चौकी और मुनेश्वर चौक आज तङके सुबह से ही सैकड़ों बंद समर्थकों का हुजूम सङक पर उतर कर दुकानदारों से काले कानून के विरुद्ध भारत बंदी के समर्थन करने का आग्रह करते हुए दुकानों को बंद कराया।

दुकानदार ने भी बंद समर्थकों की बात मानते हुए अपनी-अपनी दुकानें बंद कर ली। हुजूम आगे बढती गया और बाजार की सङकों पर सन्नाटा छाने लगी। पुनः समर्थक एन एच 322 झम्मनगंज पुल को बाँस-बल्ला से घेरकर यायतायात को अवरुद्ध किया और आगजनी करते हुए जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारी काला कानून वापस लो,नरेंद्र मोदी होश में आओ, जातपात में बाँटकर-मत करो देश का बँटवारा, प्रधानमंत्री मुर्दाबाद आदि नारा लगा रहे थे। बंद समर्थक यही तक नहीं रूके, बल्कि अपना रूख सरकारी दफ्तर की ओर भी किया ।सबसे पहले स्टेट बैंक और ऑरियंटल बैंक की जन्दाहा शाखा को बंद कराया।बंद कराने के दौरान जैसे ही समर्थकों को ब्लॉक खुले होने की जानकारी कि सभी नारेबाजी करते ब्लॉक पहुँकर बंद कराया।

परिसर में नारेबाजी की आवाज आते कर्मचारी भी बाहर निकल कर खङे थे और जैसे ही बंद करने के लिए कहा कि ताला लगा आननफानन में चल दिये। समर्थकों ने ब्लॉक पर भी जमकर नारेबाजी की। समर्थकों के आक्रोश को देखकर कर्मचारी भी सहमें हुए नजर आए ।हलांकि बहुसंख्यक मिडिया में नहीं लाने की शर्त पर वर्तमान एससीएसटी कानून को काला कानून बताने में संकोच नहीं किया और विरोध को उचित बताया । बंद समर्थकों ने किसी भी वाहन को आनेजाने नहीं दिया। यहां तक की परीक्षार्थियों को भी नहीं जाने दिया । हालांकि उसे दूसरे रास्ते की जानकारी जरूर देते थे।

वैसे भी भारत बंदी को देखते हुए परीक्षा स्थकीत हो गई, लेकिन छात्रों को पहले से जानकारी नहीं होने के कारण आना पङा ।जिसके चलते काफी परेशानी झेलने की नौवत पङी । परीक्षा कैंसिल होने की जानकारी पर परीक्षा केंद्र से लौट रही अर्चना, खुशबू प्रिया और स्वेता सलोनी काफी परेशान नजर आ रही थी, क्योंकि उसे अब लौट कर घर जाना भी मुश्किल हो रहा था। उसने कहा कि सच कहिये तो सरकार का सम्पूर्ण सिस्टम फेल हो चुका है। जब भारत बंद पूर्व नियोजित था तो आखिर क्यों नहीं पहले ही परीक्षा कैंसिल की घोषणा कर दी गई, जो आज की गई। जन्दाहा में भारत बंदी का व्यापक असर रहा और आमलोगों को खासा परेशानी झेलना पङा। बंद का अह्वान सवर्ण सेना के द्वारा किया गया था, जिसके समर्थन में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता सम्मिलित रहें।

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