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Government can't do anything without frontline Corona Warriors
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फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स के बिना सरकार कुछ नहीं कर सकती, फिर भी नहीं दी जा रही विशेष सुविधायें

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नलिनी भारद्वाज, वैशाली।  कोरोना महामारी में फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स द्वारा किया जा रहा कार्य सराहनीय है। चाहे वह सरकारी डॉक्टर हो या प्राइवेट डॉक्टर, हॉस्पिटल स्टाफ हो या सफाई वाले या फिर कोरेन्टीन सेंटर पर तैनात शिक्षक या फिर सुरक्षा व्यवस्था में लगे पुलिसकर्मी या अन्य सरकारी कर्मी। यूं कहें तो जिलाधिकारी से ले कर नीचे स्तर के कर्मचारी सब इस बढ़ते कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप में इसकी आगोश में आ रहे है। कई ने तो इसकी वजह से अपनी जान भी गवाई है और अपने कर्तव्य का पालन करते करते आगे भी अपनी जान गवा देंगे। जिस प्रकार देश की रक्षा करने के लिए हमारे वीर सैनिक बॉर्डर पर तैनात है अपनी और अपने परिवार की चिंता किए बिना उसी प्रकार कोरोना वारियर्स के रूप में पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था और कोरोना प्रोटोकॉल मेंटेन कराने में लगे हुए हैं और इसी बीच संक्रमित हो कई पुलिसवाले अपनी जान गवाई है।

पुलिस वाले की ही बात ना करें अच्छे-अच्छे ओहदे पर बैठे पदाधिकारी भी इसकी चपेट में आए हैं और अपनी जान गवाई है।  हमें सभी कोरोना वारियर्स को सम्मान करना चाहिए। आज सभी कोरोना वारियर्स असली जीवन में अभिनेता और अभिनेत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं असल में वह अभिनेता है ना की फिल्मों में कार्य करने वाले अभिनेता। हमें सम्मान कोरोना वारियर्स के रूप में कार्य कर रहे अभिनेता का करना चाहिए ना की फिल्मों में कार्य करने वाले अभिनेता का। लोग कोरोना वारियर्स से गलती होने पर उन पर लांछन लगाते हैं और कभी-कभी मारपीट पर उतारू हो जाते हैं यह काफी शर्मनाक है। गलती तो सभी से होती है और गलती नहीं होती तो वह भगवान होते ना कि इंसान। हम बात करते हैं कोरोना वारियर्स के मरने के उपरांत आखिर सरकार द्वारा उनके परिवार के लिए क्या सुविधा उपलब्ध कराई जाती है या उपलब्ध कराई जाएगी।

एक कोरोना वारियर्स के मरने के बाद उनका पूरा परिवार तहस-नहस हो जाता है उनके लिए क्या प्रावधान है। चलिए सरकारी डॉक्टर के लिए तो सरकार ने घोषणा कर रखा है परंतु अन्य कोरोना वारियर्स का क्या? आखिर पुलिस भी कदम से कदम मिलाकर कार्य कर रहे हैं आज अगर प्रशासन सही से कार्य न करें तो स्थिति ऐसी भयावह हो जाती कि सरकार से संभाले नहीं संभलेगा। हर फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स अपने अपने जगह पर कार्य में लगे हैं फिर सबके लिये एक जैसी नीति आखिर क्यों नहीं?

हम बात करते हैं विद्यालयों के शिक्षकों की जो सरकार के हर प्रोजेक्ट में बेधड़क लगा दिए जाते हैं आज सभी स्कूल बंद है पर स्कूल के शिक्षक का अपने स्कूल जाना अनिवार्य है यह कितना हास्यास्पद है। आखिर शिक्षकों का कार्य पढ़ाना है तो फिर जब बच्चे नहीं है तो फिर उन्हें स्कूल क्यों जाने का प्रावधान है। हम जानते हैं कि आकस्मिक कार्यों के लिए उनको रखा गया है तो फिर जब जरूरी होगी तब उनको कार्य करने को बुलाया जा सकता है तब तक उन्हें अपने नजदीकी विद्यालय ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का आदेश क्यों नहीं दे दिया जाता। ताकि उनको भी करोना जैसी बीमारी से बचाया जा सके ।

कोरोना वारियर्स के लिए एक ऐसा जगह क्यों नहीं बनाया जा रहा जहां संक्रमण हो जाने के बाद उन्हें आसानी से हर व्यवस्था उपलब्ध कराया जा सके ताकि उनकी जान बचाया जा सके। उनको भी आम जनता की तरह क्यों परेशान होना पड़ रहा है। क्यों दर-दर भटकना पड़ रहा है। इन सब पर सरकार को अवश्य सोचने की आवश्यकता है और सोचना भी चाहिए क्योंकि आज अगर फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स सरकार के साथ  कदम से कदम ना मिलाकर चलेंगे तो सिर्फ सरकार कुछ नही कर पायेगी। इसलिये उन्हें अवश्य सोचना चाहिए और कुछ व्यवस्था भी करनी चाहिए।

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