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पहले दोस्ती, फिर प्यार, बाद में इंकार और  फिर शादी के नाम पर बीस लाख का सौदा और हमला

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रिपोर्ट: पवन द्विवेदी, सुल्तानपुर। पहले दोस्ती, फिर प्यार, बाद में इंकार और  फिर शादी के नाम पर बीस लाख का सौदा और हमला। जी हां यह मामला किसी आम आदमी से नही बल्कि खाकी वर्दीधारी दो उपनिरीक्षकों से जुड़ा है। जिसमें भुक्तभोगी दरोगा ने अपने विभाग में ही सुनवाई न होने पर महिला दरोगा व उसके सगे-सम्बंधियों समेत आठ लोगो के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोर्ट की शरण ली।

मामला गौरीगंज कोतवाली क्षेत्र स्थित स्थानीय अधिसूचना इकाई (पुलिस कार्यालय) अमेठी में तैनात उपनिरीक्षक सत्येन्द्र कुमार से जुड़ा है। जिसने सीजेएम कोर्ट में दी गयी अजी में महिला दरोगा पूनम वर्मा व उसके सगे सम्बंधियो के खिलाफ गम्भीर आरोप लगाए है। एसआई सत्येन्द्र कुमार के आरोप के मुताबिक वर्ष 2013-14 में पुलिस ट्रेनिंग कालेज मुरादाबाद में प्रशिक्षण के दौरान उसकी मुलाकात महिला ट्रेनी दरोगा पूनम वर्मा निवासिनी सेमियागढ़ी (तरवा-बरवा) थाना खीरो जिला रायबरेली से हुई। आरोप है कि महिला ट्रेनी दरोगा ने गैर शादी-शुदा होने की जानकारी मिलने पर सत्येन्द्र कुमार से मेलजोल बढ़ा लिया और बात शादी तक पहुंच गयी, लेकिन इसी बीच सत्येन्द्र की तैनाती माह मई 2015 में आजमगढ़ जिले में हो गयी और महिला दरोगा पूनम की तैनाती इटावां में हो गयी।

जिसके बाद महिला दरोगा के परिवारीजनों ने सत्येन्द्र से फोन पर शादी की बात चलाते हुए जाति के विषय में पूछतांछ की। दोनों अनसूचित जाति के अलग-अलग उपजातियों के निकले। महिला दरोगा के परिजनों के मुताबिक सत्येन्द्र की उपजाति उनकी उपजाति से निम्न कोटि की थी। जिसका बहाना लेकर महिला दरोगा के परिजनों ने सत्येन्द्र से शादी के लिए इंकार करते हुए दूसरे से शादी कर लेने की बात कह दी।

जिसके बाद पूनम से शादी की बात को नजरअंदाज करते हुए सत्येन्द्र के परिजन उसके लिए दूसरी जगहों पर रिश्ता ढूंढने लगे। लेकिन जब यह बात महिला दरोगा पूनम को पता चली तो उसने ब्लैकमेलिंग का  खेल शुरू कर दिया। जिसके बाद पूनम ,सत्येन्द्र पर शादी के लिए दबाव बनाने लगी और नवम्बर 2016 में सत्येन्द्र के तैनाती स्थल आजमगढ़ जाकर वहाँ के एसपी से उसके खिलाफ शिकायत भी की। फिलहाल मामला विभागीय होने के चलते विभाग के लोगो ने उन्हे समझाया-बुझाया और मामला शांत हो गया। लेकिन कुछ दिनों बाद पूनम की नीयत फिर बदल गयी और सत्येन्द्र को ब्लैकमेल करते हुए बीस लाख रूपये देकर समझौता कर लेने व शादी की बात कहने लगी। ऐेसा न करने पर फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवाने की भी धमकी दी।

आरोप है कि पूनम ने एसपी अमेठी के सीयूजी नम्बर पर भी बात कर सत्येन्द्र के विषय में उल्टे-सीधे आरोप लगाए थे। इस खेल में महिला दरोगा पूनम वर्मा ने अपनी सगी बहन सीता देवी, नीलू देवी व नीलू के पति महेन्द्र का भी इस्तेमाल किया।  आरोप है कि पूनम का जीजा महेन्द्र बीते 14 सितम्बर को गौरीगंज पुलिस कार्यालय पहुंचा और बातचीत के बहाने सत्येन्द्र को आफिस से बाहर बुलाकर ले गया। जहां पर मौजूद महेन्द्र ने अपने चार-पांच अज्ञात साथियों के  साथ दरोगा सत्येन्द्र पर हमला बोल दिया। महिला दरोगा व उसके करीबियों के उत्पीड़न का शिकार हुए दरोगा सत्येन्द्र कुमार ने गौरीगंज कोतवाल व पुलिस अधीक्षक से इस सम्बंध में आरोपियों से फोन पर हुई वार्ता की रिकार्डिंग सहित अन्य सबूतों के साथ शिकायत की।

बावजूद इसके वर्दीधारियों ने वर्दीधारी की ही एक न सुनी। नतीजतन सत्येन्द्र को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। सीजेएम विजय कुमार आजाद ने दरोगा सत्येन्द्र की अर्जी पर सुनवाई के पश्चात इटावा में तैनात महिला दरोगा पूनम वर्मा, उसके जीजा महेन्द्र कुमार, बहन नीलू व सीता एवं चार-पांच अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार कार्यवाही के लिए कोतवाल को आदेशित किया है।

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