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नरक निवारण चतुर्दशी का महत्व

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रिपोर्ट: सोहन कुमार, बनमनखी।
बनमनखी अनुमंडल क्षेत्र में सोमवार को नरक निवारण चतुर्दशी को लेकर अनुमंडल के प्रायः शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भगवान शिव की पूजा-अर्चना के साथ ही लोगों ने जलाभिषेक किया। कोशी सिमांचल क्षेत्र के मिनी बाबा धाम से प्रसिद्ध धीमेश्वर नाथ महादेव के अलावा अन्य शिव मंदिरों में अहले सुबह से ही पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।

खासकर कुमारी कन्या एवं महिलाओं की भीड़ काफी ठंढ के बाबजूद भी अहले सुबह से देर शाम तक देखा गया। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से नरक नहीं जाना पड़ता है। माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को इस उपवास का प्रावधान है। शाम में व्रतियों ने बेर से पारण करने के बाद भोजन ग्रहण किया। शहर से अधिक ग्रामीण क्षेत्र में इसे लेकर उत्साह दिखा।

नरक निवारण चतुर्दशी का क्या है महत्व :-

अगर आप नर्क की यातना और पाप कर्मो के बुरे प्रभाव से बचना चाहते हैं। स्वर्ग में अपने लिए सुख और वैभव की कामना रखते हैं तो आपको स्वर्ग में अपने लिए स्थान बनाने का अवसर नहीं गंवाना चाहिए। यह चतुर्दशी भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।

शास्त्रों में इसका कारण यह बताया गया है कि इसी दिन हिमालय ने अपनी पुत्री पार्वती की शादी का प्रस्ताव भगवान शिव के पास भेजा था। यानी इसी दिन भगवान शिव का विवाह तय हुआ था।

इस तिथि से ठीक एक महीने के बाद भगवान शिव का देवी पार्वती के साथ विवाह संपन्न हुआ। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि के समान खास है । लेकिन उनमें माघ और फाल्गुन मास की चतुर्दशी शिव को सबसे अधिक प्रिय है। शास्त्रों में बताया गया है कि माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी नरक निवारण चतुदर्शी है।

इस दिन व्रत रखकर जो व्यक्ति भगवान शिव सहित पार्वती और गणेश की पूजा करता है । उन पर शिव प्रसन्न होते हैं। नर्क जाने से बचने के लिए नरक निवारण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव को बेलपत्र और खासतौर पर बेर जरूर भेंट करना चाहिए। शिव का व्रत रखने वाले को पूरे दिन निराहार रहकर शाम में व्रत तोड़ना चाहिए। व्रत तोड़ने के लिए सबसे पहले बेर और तिल खाएं।

इससे पाप कट जाते हैं और व्यक्ति स्वर्ग में स्थान पाने का अधिकारी बनता है। लेकिन सिर्फ व्रत से ही काम नहीं चलेगा आपको यह भी प्रण करना होगा कि मन, वचन और कर्म से जान बूझकर कभी किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएंगे। क्योंकि भूखे रहने से नहीं नियम पालन से पूरा होता है।

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