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दृढ़संकल्प और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता हो तो हौसलो को पंख लग ही जाते

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न्यूज़ डेस्क, बिदुपुर। दृढ़संकल्प और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता हो तो हौसलो को पंख लग ही जाते है। प्रखंड के मोहनपुर गाँव निवासी तथा भाजपा नेता संजय कुमार सिंह के पुत्र सौरव कुमार इन्ही गुणों के कारण आज चर्चा में है। सौरव का चयन नेवल आर्ममेंट इंस्पेक्शन कैडर में सब लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर हुआ है। पेशे से इंजीनियर सौरव के इस सफलता की सूचना जैसे ही परिजनों को मिली, घर मे जश्न का माहौल बन गया। बधाइयों का तांता लगना शुरू हो गया। रिश्तेदारों एवम शुभेक्षुओ के यहां से देर रात तक बधाई की घण्टी बजती रही। अनुकरण योग्य यह कि सौरव ने इस कठिन कम्पटीशन में अपने साथ के 90 प्रतिभागियों को पछाड़ कर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। परिजनों के साथ साथ गाव और समाज के लोग भी गदगद है।

दादा के सपनो को किया साकार
सौरव के दादाजी योगेंद्र प्रसाद सिंह मथुरा एवं भटौलीया हाइस्कूल के प्रधानध्यापक भी थे। उनकी इक्षा थी कि उनका पोता बड़ा ऑफिसर बने। हालांकि सौरव को यह मलाल जरूर है कि उसके दादाजी इस दुनिया मे नही है। उसने बताया कि अगर वे जिंदा रहते तो सफलता की यह खुशी कई गुणा ज्यादा बढ़ जाती। सौरव ने यह सफलता अपने श्रद्धये दादा को समर्पित करते हुए बताया कि इस सफलता के पीछे, दादी, मम्मी, पापा, चाचा, चाची एवं रिश्तेदारों के परस्पर स्नेह और आशीर्वाद का भी हाथ है।

शुरू से ही मेघावी था सौरव
सौरव बचपन से ही मेघावी रहा है। दोस्त कम जरूर थे लेकिन किताबो से गहरी दोस्ती रही। विद्यार्थी जीवन मे सेल्फ स्टडी उसका बड़ा हथियार रहा है। प्रारंभिक शिक्षा बिदुपुर के ही वैशाली सेंट्रल पब्लिक स्कूल में हुई। यही से उसने बोर्ड की परीक्षा दी और पूरे स्कूल में अव्वल आया। बारहवीं की परीक्षा सौरव ने आंध्रप्रदेश के अनंतपुर स्थित श्री सत्य साईं हायर सेकंडरी स्कूल से पास की। यहां भी उसने टॉप किया और अपना परचम लहराया। बाद में एसआरएम यूनिवर्सिटी चेन्नई से सौरव ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। बीटेक के बाद सौरव को अच्छी खासी सैलरी पर नौकरी भी मिली। नौकरी करते हुए उसने यह सफलता प्राप्त की।

घर पर था शिक्षा का बेहतर माहौल
सौरव की परवरिश ग्रामीण परिवेश में ही हुई । लेकिन घर मे बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलने के कारण उसके लिए सफलता की राहें आसान हो गयी। सौरव के पिता तथा भाजपा नेता संजय कुमार सिंह खुद अधिवक्ता है। माँ रूबी सिंह डबल एमए कर चुकी है। सौरव के बड़े चाचा विजय कुमार सिंह भी बंगलुरु के एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर है जबकि छोटे चाचा विनय कुमार सिंह रेलवे एम्प्लोयी है। सौरभ ने फोन पर बताया कि इनलोगो के मार्गदर्शन से ही मुझे यह सफलता मिली है।

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